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हिन्दू निशाने पर: एक नंगा सच "jagran junction forum"

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A ANSWER TO ALL QUESTIONS RAISING ON THE ISSUE OF TRAVANCORE PADMNABHA SWAMI TEMPLE’S PROPERTY

हिंदुस्तान में हिन्दू सदियों से निशाने पर रहा है, पहले इस्लामी आतंकियों का जेहादी जुनून फिर अंग्रेजों द्वारा धार्मिक सांस्कृतिक हृदय बिन्दुओं पर कुटिल प्रहार और स्वतंत्रता के बाद से सेकुलरिज्म के डाहपूर्ण षड़यंत्र.! जम्मू कश्मीर में लाखों हिन्दू अपने ही घरों से बेघर कर दिया गया, मुसलमानों के लिए विशेष कानून देकर देश को कमजोर और शरीयती अवधारणा को मजबूत किया गया, हिन्दू बाहुल्य भारत में मुस्लिमों के पहले हक की दुस्साहसिक व निर्लज्ज घोषणाएं की गयीं, सरकारी शिक्षा पाठ्यक्रम में शिवाजी जैसे हिन्दू आदर्शों को लुटेरा भगोड़ा बताया गया, हिन्दू धर्म के प्राणबिंदु राम कृष्ण का उपहास बनाया गया, समूचे इतिहास की हत्या की गयी, धर्मांतरण को सह दी गयी, हिन्दू धर्मगुरुओं और संतों पर कीचड उछाला गया और आज भी जारी है|

266809_133334630081646_100002153292684_237010_3963753_oआज त्रावंकर पद्मनाभ स्वामी मंदिर की प्राचीन संपत्ति के प्रकाश में आने के बाद हिन्दू द्वेष की यह मानसिकता पुनः नंगी हो गयी है| मैकाले की संतानों और सत्ता के पिशाचों के षड्यंत्रों का ही शायद परिणाम है कि जिस पद्मनाभ स्वामी मंदिर की संपत्ति की रक्षा हिन्दू राजवंश विगत ८०० बर्षो से त्यागपूर्वक कर रहे थे उसे कोर्ट का सहारा लेकर सार्वजनिक कर दिया गया| और अब केरल की नवोदित सेकुलर सरकार राजनैतिक लुटेरों और देशी-विदेशी गिद्धों की नजरें उस अमूल्य संपत्ति पर गड़ चुकीं हैं| इसे तस्करों का षड़यंत्र नहीं तो और क्या कहें कि देश की विरासत का मूल्य फ्रांस के जानकारों द्वारा निकलवाया जायेगा.!
सेकुलर मीडिया अपनी लफ्बाजिओं पर उतर आया, केरल की “मलयालय मनोरमा” जोकि सेकुलरिज्म की ठेकेदार है और इसके लिए उसके executive एडिटर “जैकब मैथ्यू” को WAN-IFRA के प्रेसिडेंट का पद देकर शाबासी भी दी गयी, ने संपत्ति की सुरक्षा चिंताओं को ताक पर रखते हुए तहखानो के नक्से तक छाप डाले| आधुनिकता का डींग हांक-हांक के हिंदी और हिन्दू संस्कृति की गर्दन पे सवार रहने बाले “टाइम्स ग्रुप” के “टाइम्स ऑफ़ इंडिया” ने तो मंदिर संपत्ति के विवेचन और १ लाख करोड़ की इस सम्पत्ति से देश का कैसे-कैसे भला(?) हो सकता है और मनरेगा और खाद्य सुरक्षा बिल के लिए कितने दिन तक पैसा मिल सकता है, यह बताने के लिए पूरा एक पेज ही भर डाला| दैनिक जागरण जैसे अखबार जोकि भारत की संस्कृति और आत्मा के संवाहक रहे है और जिनका आधार भी धार्मिक जनता ही है शर्मनाक तरीके से सेकुलरिज्म की बेशर्म दौड़ में शामिल होने के लिए सत्य और तथ्य को ताक पर रखकर आम जनमानस की भावनाओं को कुचलते हुए इन अखबारों का अनुसरण करते दिख रहे हैं| मुझे आश्चर्य है कि इन अखबारों ने यह क्यों नहीं बताया कि इस धनराशि से कितने दिनों तक हज सब्सिडी दी जा सकती है.?
हिन्दुओं की आस्थाओं को मजाक समझने वाले ये विश्लेषक आखिर क्या कहना चाहते हैं.? क्या इस देश में अब मंदिरों की संपत्ति जिसमे पुरातत्विक महत्व के अमूल्य रत्न और भगवान् विष्णु की स्वर्णमयी प्रतिमा व आभूषण शामिल हैं को बेचकर मनरेगा चलाई जाएगी.? क्या हिन्दुओ के भगवान् की प्रतिमा गलाकर अब राज्य सरकारें अपना कर्ज उतारेंगी.? क्या अब भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत बेंचकर औद्योगिक विकास किया जाएगा.?
हमारे पर्वत जंगल और नदियाँ और विदेशी कूड़े के लिए (जिसमे नाभिकीय अवशिष्ट भी हैं) जमीन सब बेंच दिए गए, प्रश्न यह है कि उनसे हमे कितना विकास दिया गया.?
भामाशाह की परंपरा का हिन्दू आवश्यकता पड़ने पर आज भी राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की तत्परता रखता है किन्तु उनकी आस्था की बाजारू कीमत लगाने वाले क्या चर्च और मस्जिदों की संपत्तियों से सरकारी खर्च चलाने की बात कहने का साहस रखते हैं.?
भारतबर्ष में वक्फ बोर्ड नाम की संस्था भारत की अकूत अचल संपत्ति को इस्लामिक संपत्ति घोषित कर उस पर कुंडली मारे बैठी है, यह संपत्ति मंदिरों की संपत्ति की भांति श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान नहीं वरन वह संपत्ति है जो किसी भी रूप में मुसलामानों से सम्बद्ध रही है|
आज वक्फ के पास ८,००,००० से अधिक रजिस्टर्ड संपत्तियां हैं| ६,००,००० एकड़ से अधिक जमीन वक्फ के कब्जे में है, जोकि अपने विश्व की सबसे बड़ी संपत्ति है, भारतीय रेलवे और रक्षा विभाग की भूमि के बाद देश का यह तीसरा सबसे बड़ा भू स्वामित्त्व है| किन्तु क्या आपको कभी बताया गया कि इस संपत्ति का मनरेगा और खाद्य सुरक्षा के लिए कैसे प्रयोग किया जा सकता है.?
वक्फ की जमीन को यदि किराये पर उठा दिया जाये तो इससे प्रतिबर्ष १०,००० करोड़ रु. की आय होगी जोकि पद्मनाभ स्वामी मंदिर की ८०० बर्षों की संपत्ति को मात्र १० बर्षो में पार कर देगी|
यदि अन्य संपत्ति को छोड़ कर सिर्फ जमीन की बार्षिक आय को ही लें तो यह प्रतिबर्ष उत्तराखंड के कुल बजट (७,८०० करोड़ रु.) से २,८०० करोड़ रु. अधिक होगा, इस आय से प्रति २.५ बर्ष में दिल्ली का बजट, प्रति ३ बर्ष में झारखण्ड का बजट, प्रति ४ बर्ष में मनरेगा का बजट, और प्रति ७ बर्ष में खाद्य सुरक्षा बजट निकल आयेगा| यदि हम १ लाख रु. प्रति व्यक्ति को देकर स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न करें तो तो प्रतिबर्ष १,००,००० व्यक्तियों को रोजगार मिल जायेगा| इमारतों को छोड़कर वक्फ के कब्जे की जमीन कोई सांस्कृतिक ऐतिहासिक विरासत भी नहीं जिसका व्यवसायिक उपयोग संभव न हो, किन्तु क्या आपने सेकुलरिस्ट चिंतकों अथवा मीडिया के मुख से ऐसे आंकड़े और तर्क सुने जैसा कि मंदिरों की संपत्ति के बारे में राग अलापा जाता है.?
मंदिरों की संपत्ति श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित धन होता है जिसका उद्देश्य धर्मसेवा व प्रसार ही है किन्तु फिर भी देश की वर्तमान आवश्यकताओं को समझते हुए अनेकानेक हिन्दू मंदिर व संस्थाएं उन जिम्मेदारियों को उठा रहीं हैं जिनका नैतिक दायित्व सरकार का है| सत्य साईं ट्रस्ट जिसकी संपत्ति पर मीडिया ने जमकर हंगामा किया ७५० गाँव में पेयजल आपूर्ति के साथ साथ चिकित्सा महाविद्यालय व उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थानों के माध्यम से शिक्षा चिकित्सा प्रदान कर रहा है, इसी तरह शिर्डी साईं ट्रस्ट, तिरुपति बालाजी ट्रस्ट, अक्षरधाम ट्रस्ट, संत आशाराम आश्रम जैसे अनेकानेक हिन्दू आस्था के केंद्र अपने अपने स्तर से बिजली, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, व गरीबों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं| इसके बाद भी इन दुराग्रही तथाकथित राष्ट्रचिन्तकों को मंदिर और संत लुटेरे नजर आते हैं और इनकी संपत्तियों के अधिग्रहण से ही देश की समस्याओं का निदान दिखाई देता है| बेशर्मी के सभी बांध तब टूट जाते हैं जब नेताओं, थानेदारों और ठेकेदारों की जूठन के टुकड़ों पर पलने वाले मीडिया के कर्णधार अपने लेखो और टेलीकास्ट में शब्दों की कलाबाजियां करते हुए धर्म की मनमानी परिभाषाएं गढ़ते और संतों धर्मगुरुओं को त्याग का उपदेश देते नजर आते हैं.!
imagesCAWDMD8Eवक्फ हिन्दुस्तान के तंत्र को धता बताते हुए ७७% दिल्ली को अपनी संपत्ति बता डालता है और ताजमहल जैसी राष्ट्रीय संपत्ति को इस्लामिक संपत्ति घोषित कर देता है (जुलाई २००५) तब भी इन तथाकथित तर्कविदों और चिंतकों की जीभ केंचुली उतारकर सो जाती है और इनकी आर्थिक गणनाएं दिखाई नहीं देतीं| क्या आप जानते हैं इस बोर्ड की सालाना अरबों की सालाना आय से कितने देशवासियों(या केवल मुसलामानों का ही जैसा कि बोर्ड का उद्देश्य है) का भला होता है अथवा दारुल-इस्लाम की स्थापना के लिए लगातार चलने बाले अभियानों यात्राओं (जिसमे कि विदेशी मौलवियों का आना जाना शामिल है) के खर्चे कहाँ से निकलते हैं.?
राजा महमूदाबाद जोकि शत्रुसंपत्ति घोषित कर अधिग्रहित की जा चुकी संपत्ति पर अपना दावा ठोंकते हैं (यह संपत्ति इनके पूर्वजों की थी जोकि १९४७ में देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे और संपत्ति राजा के नाम भी नहीं की गयी थी अतः यह संपत्ति शत्रु संपत्ति अधिनियम १९६८ के अंतर्गत शत्रुसंपत्ति घोषित कर दी गयी थी) तब यही तर्कशास्त्री उस संपत्ति का देश के किये आर्थिक मूल्य भूलकर उसे उनका हक बताते फिरते हैं और हमारी सरकार शत्रुसंपत्ति को वापस करने के लिए संशोधन विधयेक २०१० तक ले आती है| अकेले सीतापुर लखनऊ में यह संपत्ति लगभग ३०,००० करोड़ रु. है, इसी तरह उ.प्र. व उत्तराखंड के कई जिलों में उनका संपत्ति पर दावा है| इसके बाद सभी शत्रुसम्पत्तियों पर दावे मुखर होने लगें हैं और देश को लाखों करोड़ की चपत लगने की तैयारी है|
हज सब्सिडी के नाम पर प्रतिव्यक्ति लगभग ४५००० रु. हवाईयात्रा का खर्च देश पर डाला जाता है, अन्य सुविधाएँ देने में खर्च होने वाली राशि अलग है| २०१० में १७,००,००० से अधिक मुस्लिमों ने यात्रा की, अर्थात हम १,००,००० रु. प्रतिव्यक्ति के हिसाब से ८०,००० से ८५,००० गरीबों को एक बर्ष में स्वरोजगार दे सकते थे| किन्तु क्या इस तथ्य की वकालत करने की जहमत किसी बुद्धिजीवी ने उठाई.?
imagesCA666ROVइसाई मिशनरियों द्वारा देश में अवैध स्रोतों से से आने वाले हजारों करोड़ रुपयों से गरीब कमजोर लोगों का ईमान ख़रीदा जाता है, क्या देश धन के उन रहस्यमई स्रोतों पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं रखता.? किन्तु न तो मीडिया और सत्ता के सेकुलरिस्टों की आवाज अथाह धन के स्रोतों पर ही उठती है और न ही धर्मांतरण के षड्यंत्रों के विरुद्ध.!
मायावती, लालू, करूणानिधि, और मधु कोड़ा जैसे नेताओं की संपत्ति से कितने गरीबों का भला हो सकता है, क्या इनसे कोई आंकड़े नहीं बनते.?
269647_1907082798360_1280504473_31699031_2961588_n राजीव गाँधी की स्विस बैंक में जमा संपत्ति, जिसका खुलासा अमेरिका के दबाब में स्विस बैंक के माद्ध्यम से एक डच मैगज़ीन में हुआ था यदि सोनिया गाँधी देश को सौंप दे तो उससे कितने दिन मनरेगा चलेगी क्या यह हिसाब आपको दिया गया.? सरकार में बिना किसी पद के सोनिया गाँधी ने देश के लगभग १८०० करोड़ रु. पिछले १बर्ष में अपनी विदेश यात्राओं पर बर्बाद किये| ऐसा किस आधार पर किया गया और इन १८०० करोड़ रु. से कितने बेरोजगारों के जीवन को साँसे मिल सकती थीं, मंदिर की संपत्ति को सरकारी कब्जे में लेने की वकालत वालों ने क्या आपको यह बताया.?
यदि नहीं तो हर नाले के कीचड़ से अपने दामन को सजाये इन तथाकथित बुद्धिजीवियों, तर्कशास्त्रियों व चिंतकों के प्रहार देश के हिन्दुओं, देश की संस्कृति व सांस्कृतिक मूल्यों पर ही क्यों होते हैं.? उत्तर एक ही है, बच सको तो बचो……. बचा सको तो बचाओ…… …हिन्दू निशाने पर है..!

BY- वासुदेव त्रिपाठी

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141 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ranjanagupta के द्वारा
February 19, 2014

बहुत बहुत बधाई !मैंने आपका लख अब देखा ,आप जैसे बहुत सारे जगरूक हिन्दू क्यों नही है !सब कुछ सर झुका कर सहें और विद्रोह करे तो आतंक वादी कहलाएँ !यही हिन्दुयों की इस देश में गति है !मेरा लेख ईसाई मिशनरियो के धर्मान्तरण पर था !पर क्या करे हम लिखने वालो को सुनने वाले ही नही है !!

M N Gaur के द्वारा
May 20, 2013

वासूदेवजी, हाल ही अमेरिका में एक कार्यक्रम में एक रेडिओ होस्ट ने ये कहकर विस्फोट करदिया की हिलेरी क्लिंटन और ओबामा के गुप्तांग में गोली मार दूँ यही मन करता है इन सभी धर्म विरोधीयों के वामपंथीयों के कोंग्रेसी यों के धर्म निरपेक्षता वादियों के साथ भी धर्म रक्षा के लिए ऐसा ही होना चाहिए मेरा मन करता है जो सत्ता मैं बैठा संस्कृति की धर्म रक्षा ना कर सके .

Amar Singh के द्वारा
August 3, 2011

Very good Article. Bahut Acha lekh likha hai purna vivran ke saath. Proud to be an Indian. Welcome to my some articles click http://singh.jagranjunction.com/

Rajeev Kumar Deniyal के द्वारा
July 23, 2011

निशाने पर हिन्दू नहीं बल्कि आप जैसे कुछ लोगो के निशाने पर पूरा देश है , राष्टवाद की आड़ में आतंकवाद और हिंसा फैलाते है आप लोग , गुजरात को या उड़ीसा हर जगह बजरंग दल / RSS और उस के लोगो ने जो कारनामे दिखाए है वह पूरी दुनिया के सामने है ! स्वामियों के भेस में सेक्स /धन के लोभी ( यहाँ कुछ अच्छे स्वामी लोगो भी भी है ) लोगो की पूजा / निर्धन जनता का खून चूसकर जमा किया हुआ खज़ाना और फिर आप जैसे अतिवादियो का ऐसे अमानवीय क्रत्यो को समर्थन निश्चय ही देश और समाज दोनों किए लिए धातक है !

    bharodiya के द्वारा
    July 23, 2011

    कीस देश और समाज समाज की बात करते हो जनाब ? आपके चहितो और आप जैसे जईचन्दो को पाकिस्तान बना कर दे दिया है । अब क्या पूरा हिन्दुस्तान भी चाहिये ? हिन्दुस्तानमे तकलिफ है तो चले जाओ पाकिस्तान, अपने चहितो को ले के ।

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 24, 2011

    राजीव जी, चूंकि भारत में आज अपनी ही माटी जात और संस्कृति से नफरत करने वाले आस्तीन के सांपो की संख्या बहुत बढ़ चुकी है अतः मुझे आप जैसों की राष्ट्रघाती विचारों प्रतिक्रियाओं की भी अपने लेखों पर प्रतीक्षा रहती है किन्तु शायद नंगे सच को देखने के बाद दिग्भ्रमितों के चक्षु-कपाट खुल जाते होंगे अतः संपोली प्रतिक्रियाएं नहीं मिलती…, आखिर संतानें तो भारत माँ की ही हैं..! किन्तु जब आप जैसे महानुभावों की चन्द प्रतिक्रियाएं मिलती भी हैं तो भी बड़ी निराशा होती है कि तथ्यों तर्कों और आंकड़ों से दूर अपनी कुंठा और भड़ास निकलने के प्रयासों के अतिरिक्त और कुछ नहीं मिलता……..! कभी-कभी लगता है इस तथ्य के सिवाय कि भारत में मुसलामानों ईसाईयों में अधिकांश परिवर्तित हिन्दू ही हैं यह भी एक तथ्य है कि अत्याचारों के दौर में हिन्दुओं में भी उन अत्याचारियों के पापी बीज रह गए थे………………………..

    DHEERAJ PAWAR के द्वारा
    July 25, 2011

    राजीव जी इस देश को गुजरात नहीं तो क्या कश्मीर बनाओगे? जहाँ पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते है तिरंगा जलाया जाता है या फिर वो इसाई बहुल राज्य (त्रिपुरा, नागालेंड, असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, सिक्किम,) जहा नक्सलवाद अलगाववाद के नग्गे नाच नाचे जाते है और भारत से अलग होने की मांग उठती है| राजीव जी जिस ईसाइयत को आपने अपना रखा है वो धर्म नहीं है आपके बाप दादाओ का धर्म ही श्रेष्ठ है आप पुँनः अपने पवित्र धर्म में आजाइए और अपना मानव जन्म सफल कीजिये

    Harmangal के द्वारा
    August 1, 2011

    मुझे बहुत दुख हो रहा है की आप जैसे लोगो की वजह से हम अपने ही देश मे एक बार फिर दूसरों के गुलाम हुए  जा रहे हैं । क्यूँ की आप ही जैसे लोगो की गद्दारी की वजह से पहले भी गुलाम हुए थे।

    Kamal Sinver के द्वारा
    August 6, 2011

    Rajeev Kumar Deniyal आपके नाम से ही जाहिर होता हैं की आप पैसे के लालच में हिन्दू घर्म छोड़ चुके हो ..आपके खून में मिलावट हो चुकी हैं जो ऐसी बाते आपके मुह से निकल रही हैं .हिन्दू धर्म छोड़ने के लिए धन्यवाद क्यों की हमें गंदगी और मिलावट पसंद नही हैं ……….

    shailesh001 के द्वारा
    February 19, 2014

    भाई राजीव, तुम पहले ही हिन्दू धर्म के दुश्मन बन चुके हो और इस तरह की बेव कूफाना सवाल पर कोई जवाब नहीं मिलेगा.. हिन्दू धर्म पर हमला कई सालो से चल रहा है और तुम जैसे लोग उन गद्दारों के साथ खड़े हो.. रंडी की तरह अपनी जबान का इस्तेमाल कुछ भी बोलने के लिए मत करो .. आतंकी देश पर हमला करके लोगों को मारता है जबकि राष्ट्रवादी उन आतंकी को मारता है.. आर एसएस एकमात्र राष्ट्रवादी संगठन है ये बात दिमाग में डाल लो .. और अनाप शनाप मत बको..  जानो, बन्धु I

AKHILESH KUMAR YADAV YADAV के द्वारा
July 22, 2011

बच सको तो बचो……. बचा सको तो बचाओ…… …हिन्दू निशाने पर है..! http://www.yadavbasti.jagranjunction.com/2011/07/21/001/

Malik के द्वारा
July 21, 2011

Sir Kya Baat kahi Hai AApne……………kash ye baat in kamini media ko samjh main aa jaye….

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 21, 2011

    यही अपेक्षा हमें भी है मीडिया से, और हर उस व्यक्ति को जी सच को स्वीकारता है| प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

Rachna Varma के द्वारा
July 20, 2011

सबसे पहले तो ब्लागर आफ द वीक बनाने पर ढेरो बधाइयाँ बढ़िया लेख लिखा है आपने धन्यवाद

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 21, 2011

    आदरणीय रचना जी, हार्दिक आभार आपका|

vishwas kumar के द्वारा
July 19, 2011

यह बात साबित हो चुकी है कि मीडिया का एक खास वर्ग हिन्दुत्व का विरोधी है, इस वर्ग के लिये भाजपा-संघ के बारे में नकारात्मक प्रचार करना, हिन्दू धर्म, हिन्दू देवताओं, हिन्दू रीति-रिवाजों, हिन्दू साधु-सन्तों सभी की आलोचना करना एक “धर्म” के समान है। इसका कारण हैं, कम्युनिस्ट-चर्चपरस्त-मुस्लिमपरस्त-तथाकथित सेकुलरिज़्म परस्त लोगों की आपसी रिश्तेदारी, सत्ता और मीडिया पर पकड़ और उनके द्वारा एक “गैंग” बना लिया जाना। यदि कोई समूह या व्यक्ति इस गैंग के सदस्य बन जायें, प्रिय पात्र बन जायें तब उनके और उनकी बिरादरी के खिलाफ़ कोई खबर आसानी से नहीं छपती। जबकि हिन्दुत्व पर ये सब लोग मिलजुलकर हमला बोलते हैं। मीडिया देश और हिन्दु विरोधी क्यों ? http://jssvish7.jagranjunction.com/2011/07/16/मीडिया-मीडिया-हिन्दू-विर

गजानन के द्वारा
July 19, 2011

वासुदेव जी! आपको प्रथम धन्यवाद इसलिये की आपने कम शब्दों मे विस्तृत जानकारी लिखी । आपके धैर्य और अभ्यास के लिये पुनः धन्यवाद ! श्रीराम !

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 21, 2011

    भाई गजानन जी, हार्दिक आभार आपका कम शब्दों मे आपकी सधी प्रतिक्रिया के लिए|

SKKJI के द्वारा
July 19, 2011

हम उस देश के वासी हैं जिस देश के वासिओं को यह भी नहीं पता के उनका धरम काया हैI पूरे विश्व मैं ईसाई अवम मुस्लमान लढ़ लढ़ कर अपना वर्चस्व सिद्ध करने में लगे हैं I वैदिक धर्म और हिंदी संसथाएँ और हिन्दू पूरे विशव मैं इन दोनों के बीच समाधान मैं लगा है I कहीं न कहीं इन समुदायों की लढ़ाई को ठंडा करने में हिन्दू एवं वैदिक विचारधारा का महत्वपूरण योग दान है I इसी कारण वैदिक विचारधारा दोनों जातियों के विरोधाबह्स का सामना कर रही है I यही है कारण की हम सदा ही इन जातियों की उष्णता का सेक ले रहे हैं I मैं समझता हूँ वैदिक विचारधारा एवं हिंदुत्व का विश्व शांति मैं एक महत्वपूरण योगदान है अगर आप मैं से किसी ने पुस्तक “fountainhead of all religions ” पढ़ी हो तो आप आसानी से समझ लेंगे की इससाई एवं मुस्लिम जातियां वैदिक धर्म की ही कढ़ी हैं और कोई भी मां हज़ार गाली खाने के बाद भी अपने बच्चों का ध्यान जरूर करेगा

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 21, 2011

    SKKJI हार्दिक आभार आपका आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए| निश्चित रूप से भारतीय वैदिक विचारधारा समन्वय की विचारधारा है|

allrounder के द्वारा
July 19, 2011

वासुदेव जी एक सशक्त लेख और ब्लौगर ऑफ़ द वीक चुने जाने पर हार्दिक बधाई !

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 19, 2011

    भाई सचिन जी, आपका हार्दिक आभार|

roshni के द्वारा
July 18, 2011

वासुदव जी आज आपको पहली बार पढ़ा और बस पढती गयी … ऐसा लगा की हमारी सोच को ही किसी ने शब्द दे दिए .. न्यूज़ पर ये खबर देख कर मन मे यही सवाल उठ रहे थे की किस तरह मंदिर की सम्पति पर सबकी गीध नजर गड गयी है जो की चिंताजनक है .. मिडिया अख़बार वालों का रोल बी शर्मनाक कहा जायेगा … अच्छा लेख लिखा अपने बधाई

    Rohit Shara के द्वारा
    July 19, 2011

    shame on u Roshni try to understand hindu religion –its a great religion if u read it completly u wont hate any 1 u love all–dont talk like crimnals like Vasudev shame on this man

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 19, 2011

    Hey you Rohit! First you must read the definition of religion and dharma then you will find yourself able to comment on this post. as for as I think you have little or no knowledge about anything. Shame on you as without picking up the points of disapproval you started to rebuke a person who have much knowledge about contemporary Indian politics than you.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 19, 2011

    रोशनी जी, बिलकुल सही कहा आपने| हमारे देश में ये नया नहीं है, हमारे टैक्स का दशकों से तुष्टिकरण के लिए दुरपयोग हो रहा है, मंदिरों के चढ़ावे से मस्जिदों और चर्चों के खर्चे चलाये जाते रहे हैं| जब हममे से कोई इस अन्याय और इसके आकाओं जोकि देश को तोड़ने के षड्यंत्र में लगे हैं के विरुद्ध आवाज उठाता है तो कुछ रंगे सियार कहीं हमें थोथ गालियाँ देकर अपनी कुंठा शांत करने का प्रयास करते हैं अथवा अपने थोथे उपदेश देकर अपने मानसिक पाप को छुपाते हैं…. धर्म को समझने का उपदेश देने वालों की वास्तविकता यह है की उन्हें अपनी मानसिकता की सडन के चलते सच्चाई से अपच हो जाती है| कहीं न कहीं देश के हत्यारों की ये मानस संतानें अपना पितर-ऋण चुकाने के लिए कसम खाए बैठी हैं… और इसके लिए देश की संस्कृति और प्राचीन यथार्थ की हत्या उनके लिए आवश्यक है……………

    shivanand के द्वारा
    July 19, 2011

    रोहित सठ क्या तुमने हिन्दू धरम के bare में सब पद लिया है की यह किसी और प्रभाब है….. जैसे मैकाले साहब का

    Jatin Tomar के द्वारा
    July 20, 2011

    What to be shamed to protect our religion? If our very government is keen to destroy our culture, then why shouldn’t we protect? 33 crore people are called minority that’s enough example to show the biased mentality of government.

Jitendra के द्वारा
July 18, 2011

भाई वासुदेव, दिल खुश कर दिया पर दिल रोने लगा है खून के आंसू की भारत की जनता अब क्या चाहती है अगर अब भी न जगे तो मिट जाऊगे ऐ हिंदुस्तान वालो किताबो में तुम्हारा नाम तक भी शेष न होगा भाई मन तो करता है की सब के सब को लाइन से खड़ा करके इतना मारू की दोबारा जनम लेने में शर्म आये. और क्या लिखूं आपकी तरह नहीं लिख सकता नहीं तो दिल में बहुत गुबाआर है.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 19, 2011

    जितेन्द्र जी, देश की दुर्दशा पर कष्ट होना किसी भी देशवासी के लिए स्वाभाविक है, आप इसके लिए साधुवाद के पात्र हैं|

Anil Gupta के द्वारा
July 18, 2011

कांग्रेस को जयचंद और कसाब कांग्रेस का नाम देना चाहिया .आपका लेख हर हिन्दू को पड़ना चाहिए .

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 19, 2011

    अनिल जी, राष्ट्र हितों और बहुरूपियों को पहचानना हर हिन्दुस्तानी का कर्तव्य है| आपका हार्दिक धन्यवाद|

Piyush Srivastava के द्वारा
July 18, 2011

कौन कहता है कि भारत के पास धन नहीं सच तो ये है जो अभी अभी मैंने पढ़ा है……. धन्यवाद वासुदेव जी

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 18, 2011

    हार्दिक आभार पियूष जी, आशा करता हूँ यह सच एक श्रंखला बनाता हुआ हर भारतवासी तक पहुंचेगा|

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 18, 2011

    आदरणीय मिश्र जी, आपके द्वारा सतत सहयोग के लिए मैं आपका आभारी हूँ, आशा है ये लिंक सभी पाठकों में जागरूकता पैदा करेंगी|

rajuahuja के द्वारा
July 17, 2011

वाह,क्या बात कही ! लाजवाब, तथ्यपूर्ण,दमदार लेख ! भीतर तक हिला दिया ! बहुत धुंध थी, जो अब छटने लगी है ! साधुवाद !

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 18, 2011

    आदरणीय राजू जी, हार्दिक धन्यवाद| आशा है आप भारतीय जनमानस पर जमी धुंध को छाटने के इस प्रयास को आगे बढ़ाएंगे और एक छोटा सा प्रयास एक वैचारिक क्रांति का रूप ले लेगा|

vishwas के द्वारा
July 17, 2011

जिस तरह काफ़ी समय से कांग्रेस की कोशिश रही है कि उसके “10 किलो के भ्रष्टाचार” और भाजपा के 100 ग्राम भ्रष्टाचार को तराजू में रखकर बराबरी से तौला जाये, उसी प्रकार अब दिग्विजय सिंह जैसे लोगों के ज़रिये यह जी-तोड़ कोशिश की जा रही है कि किस प्रकार पाक प्रायोजित जेहादी आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद को एक पलड़े पर लाया जाये… चूंकि मीडिया में कांग्रेस के ज़रखरीद गुलाम भरे पड़े हैं और हिन्दुओं में भी “जयचन्द” इफ़रात में मिल जाते हैं इसलिये कांग्रेस की यह कोशिश रंग भी ला रही है। कांग्रेस ने पाकिस्तान को जानबूझकर यह कार्ड भी पकड़ा दिया है, और इसका बखूबी इस्तेमाल वह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर करेगा ही। 26/11 के बाद पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर चौतरफ़ा जिस प्रकार घेरा गया था, अब “हिन्दू आतंक” के नाम पर सेकुलरों द्वारा खुद एक डाकू को ही “चोर-चोर-चोर” चिल्लाने का मौका दिया गया है. http://jssvish7.jagranjunction.com/2011/07/16/मीडिया-मीडिया-हिन्दू-विर

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    विश्वास भाई, भाजपा के १०० ग्राम और कांग्रेस के १० किलो भ्रष्टाचार की उक्ति तो सही हो सकती है, किन्तु हिन्दू आतंकवाद नाम का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता| यह शब्द जयचंदों की मानस संतान के अतिरिक्त और कुछ नहीं…….

gopesh के द्वारा
July 17, 2011

वासुदेव त्रिपाठी जी , ये कांग्रेस सरकार २००९ में जब फिर से सत्ता में आई तो हमे बहुत आश्चर्य हुआ की कैसे ये सरकार फिर से चुन ली गयी! क्या अब लोग इससे अपने देश को बेचने का ही इरादा रखते हैं? जिस भारत में हमेशा से नए नए ज्ञान के क्षेत्र में प्रयोग होते थे , वहीँ लोग इतने अज्ञानी हो चले हैं की उन्हें सही या गलत में फर्क ही नहीं लगता है! हमारी आत्मा रो रही है! बाबा रामदेव ने कालेधन को वापस लाने का क्या संख्नाद किया , इस सरकार के होश ही उड़ गए क्यूंकि स्विस बैंकों में सबसे ज्यादा पैसा इसी के जमा हैं! पद्मनाभ स्वामी के मंदिर से निकला धन हमारे गौरवशाली इतिहास का अमूल्य धरोहर है , इसे जैसा है उसी हाल पे छोड़ देना चाहिए! सोमनाथ मंदिर को तो महमूद गजनबी ने लुटा और अब इसे लुटाने की तयारी हमारे तथाकथित छद्म पंथ निरपेक्ष लोग कर रहे हैं! नित्य ही हिन्दू वादी संगठनों पर तरह तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं, क्यूँ? क्यूँ किसी को कश्मीर से भगाए गए पंडितों का दर्द नहीं दीखता , क्यूँ किसी को उड़ीसा में स्वामी और अन्य राज्यों में जबरन इसाई धर्म अपनाने के लिए लोगों का विवश करना नहीं दीख पड़ता है! हम अब और नहीं सह सकते हैं, आखिर ये जनता जो की मध्यकाल से ही सो रही है कब जागेगी! आचार्य चाणक्य की तरह क्या अब कोई और नहीं होगा जो की हममे प्रबल राष्ट्रवाद की भावना जागृत कर इन भौतिकवादी एवं राष्ट्रद्रोहियों को सत्ता से बेदखल करके राष्ट्रवाद के एक नए इतिहास का सूत्रपात कर सके! ह्रदय को झकझोर देने वाला ये अत्यंत आवश्यक लेख लिखने के लिए आपका आभार!

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    भाई गोपेश जी, आपके शब्द-शब्द में एक राष्ट्रप्रेमी की पीर झलक रही है| यही राष्ट्रप्रेम हमारा मस्तक गर्व से उठा देता है| हमें विश्वास है माँ भारती की कोख एक नहीं कई चाणक्य देगी, वह हम आप में से ही एक होगा| किन्तु हमें भविष्य की ओर टकटकी लगाकर देखते रहने की अपेक्षा आज अपने कर्तव्यों को पहचानना और स्वीकारना चाहिए, आज समय एवं राष्ट्र की यही मांग है| आपकी सशक्त प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

alka mittal के द्वारा
July 17, 2011

वासुदेवजी कुछ कटु सत्यो को उजागर करने का साहस दिखाने के लिए साधुवाद . सोच से धर्मनिरपेक्ष होना और कर्म से धर्मनिरपेक्ष होना दो अलग बाते है.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    अलका जी, सत्य के साथ साहस का स्वाभाविक रिश्ता है| निश्चित तौर पर रंगे सियार ही आज अधिक हैं| प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद|

atharvavedamanoj के द्वारा
July 17, 2011

अरे खुस कर दित्ता यार|तैने तो अपने मन की सारी बात ही उड़ेल कर रख दी और वह भी फ़ोकट में थोक के माफिक|मजा आ गया|जियो, जीते रहो शेर और यूँ ही दहाड़ते रहो भूखे शेर की माफिक|वन्देमातरम भैया…सचमुच वन्देमातरम हो|

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    भाई अथर्ववेद मनोज जी, आत्मविभोर करने वाली अद्भुत अनोखी प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार| सप्रेम, सगर्व, वन्देमातरम|

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 17, 2011

    यह दिल की आवाज है डिअर…एकदम फुफकारता हुआ लेख है…और खामोश करने वाला भी..प्रश्न भी बेहतरीन तरीके से उठाये गए हैं…सचमुच निरुत्तर कर देगा…लेकिन भैये इस मंच पर कुछ कुतार्किक लोग भी हैं..जो भैस और गाय के पवित्र दाम्पत्य सूत्र बंधन में विश्वास रखते हैं|थोडा बच के रहियों|जय भारत, जय भारती|

जयदीप शेखर् के द्वारा
July 17, 2011

मन्दिर की सम्पत्ति मन्दिर में ही रहनी चाहिए. वैसे भी, यह कोई रूपये-पैसे में तो है नहीं, सोने-चाँदी-जवाहरात में है, ऐसी चीजें “धरोहर” होती हैं. देश के विकास में लगाने के स्विस बैंकों से काले धन को देश में लाया जाना चाहिए. दूसरी बात, आज यह भले लाख करोड़ की सम्पत्ति लग रही है, मगर याद कीजिये, तीन-चार सौ साल पहले सोने-चाँदी के ही सिक्के चलते थे, इन्हीं से आभूषण इत्यादि बनते थे और उस जमाने में इनकी कीमत कुछ खास ज्यादा नहीं रही होगी. 40-50 साल पहले ही सोने का क्या भाव था? मुझे नहीं लगता कि पद्मनाभ मन्दिर की सम्पत्ति को लेकर हमारी आँखें फैलनी चाहिए, या इसे खर्च करने के बारे में सोचना चाहिए. जैसे घरों में आभूषणों को “आपात्कालीन” धन के रूप में सहेज कर रखा जाता है, वैसे ही इस धन को सुरक्षित रख देना चाहिए- उसी मन्दिर में, उसी तहखाने में, उसी तरीके से. हाँ, आधुनिक कुछ सुरक्षा उपाय भी अपनाये जाने चाहिए. रही बात हिन्दुओं के निशाने पर रहने की, तो यह एक सच्चाई है. देश की सत्ता को सोनिया के हाथों से छीनना जरूरी हो गया है. इतिहास की बात करें तो 10वीं-11वीं सदी में जब पश्चिमोत्तर प्रान्त में आक्रमण पर आक्रमण हो रहे थे, तब हम वहाँ किलेबन्दी करने के बजाय खजुराहो में अन्तिम कुछ मन्दिरों के नींव रखने में व्यस्त थे. इस लापरवाही का बहुत बड़ा खामियाजा हम भुगत चुके हैं.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    भाई जयदीप जी, मैं आपके विचारों से पूर्णतयः सहमत हूँ कि मंदिर की संपत्ति जड़ संपत्ति नहीं बल्कि हमारी धरोहर है, जैसा कि मैंने लेख में लिखा है कि पुरातात्विक व सांस्कृतिक महत्व की दृष्टि से पद्मनाभ स्वामी संपत्ति अमूल्य है अतः इसका कोई बाजारू मूल्य लगाना न सिर्फ मूर्खता होगी वरन बेईमानी भी| निश्चित तौर पर हम अतीत में समय की हवा को नहीं परख पाए और बहुत कुछ खोया, आज हमें इतिहास से बहुत कुछ सीखना है| प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

rajesh के द्वारा
July 16, 2011

बहुत सुन्दर लेख .हार्दिक बधाई

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    भाई राजेश जी, आपकी बधाई स्वीकार| हार्दिक धन्यवाद|

vikramjitsingh के द्वारा
July 16, 2011

आदरणीय त्रिपाठी जी, इस मंच का नया ब्लॉगर होने के नाते, मैं तो यही कहूँगा कि जिस भाषा का इस्तेमाल अपने लेख में आपने किया है, अथवा सत्ता के नशे में चूर इन दरिंदों को संबोधित किया है, वो काबिले तारीफ है, लेकिन अगले चुनावों तक हिन्दुस्तान की जनता आपकी इन बातों को याद रख पायेगी, क्योंकि जनता को भूलने की आदत है, आप वक्फ बोर्ड की बात करते हैं, लेकिन शायद ये बात भी किसी किसी को ही मालूम होगी कि सोनिया और उसकी चंडाल चोकड़ी जल्दी ही एक नया विधेयक लाने जा रही है, जिसमें किसी भी हिन्दू को, किसी भी मुसलमान अधिकारी अथवा नागरिक पर कोर्ट केस या शिकायत करने का हक नहीं होगा, जबकि कोई भी मुसलमान किसी भी हिन्दू नागरिक अथवा अधिकारी के विरुद्ध कोर्ट केस अथवा शिकायत करने के लिए आजाद होगा, और जब तक केस अथवा शिकायत का निपटारा नहीं हो जाता, मुसलमान की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी. हिन्दू नागरिक अथवा अधिकारी को अंत तक पता भी नहीं चलेगा कि किसने उसके ऊपर केस अथवा शिकायत की हुई है. त्रिपाठी भाई, आपका कहना बिलकुल सही है, हिन्दुस्तान में ही हिन्दुओं को कुचला जा रहा है, लेकिन ये शायद हिन्दुओं की कमजोरी नहीं है, हिन्दू ने अपने आप को खुद इन भेडियों के हवाले किया है, या शायद ये कहा जायेगा, कि हिन्दू ने अपने आपको इतने वर्गों में बाँट लिया है, जिसका फायदा ये सत्ता के भूखे भेड़िये उठा रहे हैं. अगर हिन्दुओं में एकता होती, तो आज़ादी से लेकर आजतक बात ही कुछ और होनी थी, अगर आज भी अकेला हिन्दू वर्ग कसम उठा ले तो हिंदुस्तान, इन ज़लील दरिंदों के चंगुल से आजाद हो सकता है….. ये हो सकता है, बात है हम आपको मिलके इस मसले पर गौर करने की, ताकि हिंदुस्तान किसी और का नहीं, हिंदूंओं का बन सके, सप्ताह का ब्लॉगर बनने पर मेरी तरफ से शुभकामनाएं….

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    भाई विक्रमजीत जी, आपका मंच पर हार्दिक स्वागत है| जिस विषय पर आपने चिंता व्यक्त की है हमारे कई पाठक भाइयों ने यह प्रश्न उठाया है| निश्चित रूप से हिन्दुओं के विरुद्ध ऐसे षड़यंत्र आज राष्ट्र के सम्मुख भावी खतरों की चेतावनी हैं जिसका हमें अपनी पूर्ण सामर्थ्य व जागरूकता के साथ प्रतिरोध करना है| इस विषय पर जागरूकतासर्वप्रथम आवश्यक है, जिसके लिए हमे एकजुट प्रयास कर के देश को खड़ा करना है| समय मिलने पर इस विषय पर लेख के साथ उपस्थित होने का प्रयास करूंगा| आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद|

vishwas के द्वारा
July 16, 2011

आज कल हिन्‍दूओं को गाली देना तो एक फैशन हो गया है, वोट वैंक की राजनी‍ति के कारण आज कोई भी राजनेता इस ओछी हरकत को कर देता है। और आज की मिडीया ,पुलिस प्रशासन भी इन्‍ही की हाथ की कठपुतली बन चुकी है. मीडिया हिन्दू-विरोधी क्यों है, इसका जवाब इन रिश्तों में मिलेगा.. http://jssvish7.jagranjunction.com/2011/07/16/मीडिया-मीडिया-हिन्दू-विर/

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    विश्वास भाई, निश्चित रूप से आपके शब्द शतप्रतिशत सही हैं| इन रिश्तों के मायाजाल ने आज सम्पूर्ण भारत को पथभ्रमित कर रखा है| मैंने आप द्वारा दी गयी शीर्ष सूची सहित निचले स्तर पर इस महाजाल की पर्याप्त खोजबीन की है परिणाम निश्चित रूप से निराशाजनक और भविष्य के खतरे के संकेत हैं| सभी पाठकों को ऐसे जटिल सत्य से अवगत कराने के लिए आपका धन्यवाद|

दिवाकर मणि के द्वारा
July 16, 2011

आदरणीय त्रिपाठी, सर्वप्रथम सप्ताह का सर्वाधिक चर्चित ब्लॉगर बनने के लिए कोटिशः बधाइयां. आपका यह आलेख सभी राष्ट्रभक्तों की आवाज का प्रतिनिधि बनकर उभरा है. काश कि राजनेता भी इस बात को समझ पाते! ”समझ पाते” क्या वे तो समझकर भी अनजान बने हैं, अगर इस मुद्दे को उभारेंगे तो पापी कुर्सी के लिए निहायत ही आवश्यक वोट के खिसक जाने का खतरा उठाना पद सकता है. महोदय, इस वोट बैंक वाली राजनीति के दौर में गलती भी तो हिंदुओं की है, जब तक जाति-उपजाति से ऊपर उठकर एक होकर हिंदू वोट नहीं डालेंगे, तब तक यही स्थिति रहने वाली है.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    दिवाकर जी, आपकी बधाई स्वीकारते हुए आपको धन्यवाद| मेरे लेख की सार्थकता और मेरे संतोष का विषय यही है कि जिस उद्देश्य को सामने रखकर यह लेख लिखा था उसे पाठकों ने सम्पूर्ण सम्मान देते हुए बढ़-चढ़ के पढ़ा और उद्देश्य को भी सिद्ध करने में पूर्ण सहयोग दिया| आज सम्पूर्ण भारतबर्ष को इसी तत्परता की आवश्यकता है| निश्चित रूप से हिन्दुओं को आज जातिगत भेद भूलकर एकजुट होने की आवश्यकता है, यही एकमात्र मार्ग एकमात्र विकल्प है|

Ramesh Nigam के द्वारा
July 16, 2011

My Dear Tripathi, U r 100% correct. However, what I wud like 2 add is that from the facts highlighted by u, it is evident that the Hindu philosophy miserably failed to protect the Hindu darshan, culture, language, land, ……………….., especially it failed to thwart the onslaught of Islam and Christianity. So I feel, the Hindu philosophy needs some radical changes. I also feel that the Hindu must incorporate certain aspects from Islam & Christianity, similar to what was needed by our ancient RAJAS, in the field of technology and strategy to face the invaders. Only a cry like a widow will not help.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    ramesh ji, thanks for your valuable comment. i agree with you but one thing which i want to reveal that hinduism doesn’t need to change itself into anyother’s philoshiphy. hinduism teaches love but GITA says it is reserved for good humble an honest people. For wicked persons शठे शाठ्यम समाचरेत, policy is reserved. Shashtra says “आततायिनमायान्तं हन्या देवा विचारायन” ,means kill such persons without taking a minute to think. The problem began when we learnt the lesson of love & mercy but forgot revenge & bravery. Our scriptures like GITA & RAMAYAN teaches the same lesson. We need not to take any lesson fron christianity & islam but we need to retrieve our forgotten lessons back.

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 19, 2011

    My dear ramesh This is lamb excuse to hide our incapability to thwart the dangers of jihadi or crusaders from Indian arena.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    आदरणीय मिश्र जी, पाठकों के लिए बहुउपयोगी लिंक प्रस्तुत करने के लिए आपका धन्यवाद| पाठकों से निवेदन है कि लिंक से letter.pdf हटाकर साईट के होमपेज पर जाकर और अन्य अतिरिक्त जानकारी ले सकते हैं|

K M Mishra के द्वारा
July 16, 2011

सोनिया गांधी का सच लेखक – एस. गुरुमूर्ति जब श्वेजर इलस्ट्रेटे ने यह आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने राजीव गांधी द्वारा घूस में लिए गए पैसे को राहुल गांधी के खाते में रखा है तो मां-बेटे में से किसी ने न तो विरोध किया और न ही इस पत्रिका के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की। राजनीति में राजीव गांधी ने सबसे खतरनाक गलती क्या की थी? यह बताने में दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं पड़ना चाहिए कि उनकी सबसे बड़ी गलती खुद ईमानदार होने का दावा करते हुए अपने को मिस्टर क्लीन के तौर पर पेश करना थी। यह उनके लिए घातक साबित हुआ। इंदिरा गांधी उनसे अलग थीं। जब उनसे उनकी सरकार के भ्रष्टाचार के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह तो पूरी दुनिया में चल रहा है। यह बात 1983 की है। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने इसके बाद यह कहा था कि जब इतने उच्च पद पर बैठने वाला इसे तर्कसंगत बता रहा है तो ऐसे में आखिर भ्रष्टाचार पर काबू कैसे पाया जाएगा। इन बातों का नतीजा यह हुआ कि इंदिरा गांधी पर कभी किसी ने भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया। क्योंकि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि वह ईमानदार हैं। पर इसके उलट राजीव गांधी ने अपनी ईमानदारी के दावे कर खुद को कड़ी निगरानी में ला दिया। राजीव गांधी की ईमानदारी की पोल 1989 में बोफोर्स मामले पर खुल गई और जनता ने इसकी सजा देते हुए उन्हें और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया। सियासी लोगों के लिए इस घटना ने यह सीख दी कि अगर आप ईमानदार नहीं हैं तो कभी ईमानदारी के दावे मत कीजिए। पर यह सीख खुद गांधी परिवार को याद नहीं है। इस मामले में सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के सुरक्षित रास्ते को न चुनकर राजीव गांधी के घातक रास्ते पर चलने का फैसला किया है। इसके नतीजे भी उनके लिए दुखदायी होने की ही उम्मीद है। तो क्या 1987 से 1989 के बीच की राजनीति का एक बार फिर दुहराव होने वाला है? इंदिरा को भूलकर राजीव की राह चलने वाली सोनिया गांधी ने 2010 के नवंबर में इलाहाबाद में हुई पार्टी की एक रैली में भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने यानि जीरो टालरेंस की बात कही थी। इसके कुछ दिनों बाद ही जब दिल्ली में कांग्रेस अधिवेशन हुआ तो सोनिया गांधी ने फिर यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी भी भ्रष्ट लोगों को नहीं बख्शा है क्योंकि भ्रष्टाचार से विकास बाधित होता है। इसी तरह का भाषण राजीव गांधी ने 25 साल पहले मुंबई अधिवेशन में दिया था। इस मसले पर राजीव दो मामलों में सोनिया से अलग थे। जब राजीव गांधी ने खुद को मिस्टर क्लीन कहा था उस वक्त ऐसा कोई घोटाला नहीं था जिसकी वजह से उन्हें रक्षात्मक होना पड़े। पर सोनिया ने तो राष्ट्रमंडल, आदर्श और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बीच ईमानदार होने का दावा किया है। दूसरी बात यह कि राजीव ने बिल्कुल शून्य से शुरुआत की थी और उनकी मिस्टर क्लीन की छवि को खत्म करने का काम तो बोफोर्स घोटले ने किया था। इसके विपरीत सोनिया गांधी के खिलाफ घूसखोरी के तौर पर अरबों डालर लेकर स्विस बैंक खातों में जमा करने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। इसमें बोफोर्स सौदे में क्वात्रोचि से मिले लाखों डॉलर शामिल नहीं हैं। स्विट्जरलैंड की एक प्रतिष्ठित पत्रिका और रूस के एक खोजी पत्रकार ने सोनिया गांधी के परिवार पर घूसखोरी में लिप्त होने के कई सबूत जुटाकर सबके सामने रखा है। इस बात के दो दशक बीत जाने के बाद भी सोनिया ने आरोपों का न तो खंडन किया है और न ही खुलासा करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है। इसकी पृष्ठभूमि में सोनिया गांधी की वह बात ढकोसला मालूम पड़ती है जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात कही है। दरअसल, कहानी कुछ इस प्रकार है। 2.2 अरब डॉलर से 11 अरब डॉलर! स्विस बैंक में सोनिया गांधी के अरबों डालर जमा होने की बात खुद स्विट्जरलैंड में ही उजागर हुई। यही वह देश है जहां दुनिया भर के भ्रष्टाचारी लूट का धन रखते हैं। स्विट्जरलैंड की सबसे लोकप्रिय पत्रिका श्वेजर इलस्ट्रेटे ने अपने 19 नवंबर, 1991 के एक अंक में एक खास रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें विकासशील देशों के ऐसे 13 नेताओं का नाम था जिन्होंने भ्रष्ट तरीके से अर्जित किए पैसे को स्विस बैंक में जमा कर रखा था। इसमें राजीव गांधी का नाम भी था। श्वेजर इलस्ट्रेटे कोई छोटी पत्रिका नहीं है बल्कि इसकी 2.15 लाख प्रतियां बिकती हैं और इसके पाठकों की संख्या 9.17 लाख है। यह संख्या स्विट्जरलैंड की कुल वयस्क आबादी का छठा हिस्सा है। केजीबी के रिकार्ड्स का हवाला देते हुए पत्रिका ने लिखा, ”पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी अपने नाबालिग बेटे के नाम पर एक गुप्त खाते का संचालन कर रही हैं जिसमें ढाई अरब स्विस प्रफैंक यानि 2.2 अरब डालर हैं।” राहुल गांधी 1988 के जून में बालिग हुए थे। इसलिए यह खाता निश्चित तौर पर इसके पहले ही खुला होगा। अगर इस रकम को आज के रुपए में बदला जाए तो यह 10,000 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। स्विस बैंक अपने ग्राहकों के पैसे को दबा कर नहीं रखता है, बल्कि इसका निवेश करता है। सुरक्षित दीर्घ अवधि वाली योजनाओं में निवेश करने पर यह रकम 2009 तक बढ़कर 9.41 अरब डालर यानी 42,345 करोड़ रुपये हो जाती है। अगर इसे अमेरिकी शेयर बाजार में लगाया गया होगा तो यह 58,365 करोड़ रुपए हो गई होगी। यदि घूस की इस रकम को आधा दीर्घावधि निवेश योजनाओं में और आधा शेयर बाजार में लगाया गया होगा, जिसकी पूरी संभावना है, तो यह रकम 50,355 करोड़ रुपए हो जाती है। अगर इस पैसे को शेयर बाजार में लगाया गया होता तो 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी से पहले यह रकम 83,900 करोड़ रुपए होती। किसी भी तरह से हिसाब लगाने पर 2.2 अरब डालर की वह रकम आज 43,000 करोड़ रुपए से 84,000 करोड़ रुपए के बीच ठहरती है। केजीबी दस्तावेज सोनिया गांधी के खिलाफ कहीं ज्यादा गंभीर तरीके से मामले को उजागर किया रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी ने। एजेंसी के दस्तावेजों में यह दर्ज है कि गांधी परिवार ने केजीबी से घूस के तौर पर पैसे लिए। प्रख्यात खोजी पत्रकार येवगेनिया अलबतस ने अपनी किताब ‘दि स्टेट विदिन ए स्टेट: दि केजीबी एंड इट्स होल्ड ऑन रसिया-पास्ट, प्रजेंट एंड फ्यूचर’ में लिखा है, ”एंद्रोपोव की जगह लेने वाले नए केजीबी प्रमुख विक्टर चेब्रीकोव के दस्तखत वाले 1982 के एक पत्र में लिखा है- ‘यूएसएसआर केजीबी ने भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे से संबंध बना रखे हैं। आर गांधी ने इस बात पर आभार जताया है कि सोवियत कारोबारी संगठनों के सहयोग से वह जो कंपनी चला रहे हैं, उसके कारोबारी सौदों का लाभ प्रधानमंत्री के परिवार को मिल रहा है। आर. गांधी ने बताया है कि इस चैनल के जरिए प्राप्त होने वाले पैसे का एक बड़ा हिस्सा आर गांधी की पार्टी की मदद के लिए खर्च किया जा रहा है।” (पृष्ठ 223)। अलबतस ने यह भी उजागर किया है कि दिसंबर, 2005 में केजीबी प्रमुख विक्टर चेब्रीकोव ने सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय समिति से राजीव गांधी के परिवार को अमेरिकी डालर में भुगतान करने की अनुमति मांगी थी। राजीव गांधी के परिवार के तौर पर उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मां पाओला मैनो का नाम दिया था। अलबतस की किताब आने से पहले ही रूस की मीडिया ने पैसे के लेनदेन के मामले को उजागर कर दिया था। इसके आधार पर 4 जुलाई 1992 को दि हिंदू में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें कहा गया, ”रूस की विदेशी खुफिया सेवा इस संभावना को स्वीकार करती है कि राजीव गांधी के नियंत्रण वाली कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए केजीबी ने उन्हें सोवियत संघ से लाभ वाले ठेके दिलवाए हों।’ भारतीय मीडिया राजीव गांधी की हत्या की वजह से उस वक्त भारतीय मीडिया में स्विट्जरलैंड और रूस के खुलासों की चर्चा नहीं हो पाई। पर जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली तो भारतीय मीडिया की दिलचस्पी इस मामले में बढ़ गई। जाने-माने स्तंभकार एजी नूरानी ने इन दोनों खुलासों के आधार पर 31 दिसंबर 1998 को स्टेट्समैन में लिखा था। सुब्रमण्यम स्वामी ने श्वेजर इलस्ट्रेटे और अलबतस की किताब के पन्नों को स्कैन कर अपनी जनता पार्टी की वेबसाइट पर डाला है। इसमें पत्रिका का वह ई-मेल भी शामिल है जिसमें इस बात की पुष्टि है कि पत्रिका ने 1991 के नवंबर अंक में राजीव गांधी के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जब सोनिया गांधी ने 27 अप्रैल, 2009 को मैंगलोर में यह कहा कि स्विस बैंक में जमा भारतीय काले धन को वापस लाने के लिए कांग्रेस कदम उठा रही है तब मैंने 29 अप्रैल, 2009 को इन तथ्यों को शामिल करते हुए एक लेख न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखा। काला धन वापस लाने के सोनिया गांधी के दावे के संदर्भ में इस लेख में उनके परिवार के भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया गया। जाने-माने पत्रकार राजिंदर पुरी ने 15 अगस्त 2006 को केजीबी के खुलासों पर एक लेख लिखा था। इंडिया टुडे के 27 दिसंबर, 2010 के अंक में राम जेठमलानी ने स्विट्जरलैंड में हुए खुलासे की बात कहते हुए यह सवाल उठाया कि वह पैसा अब कहां है? साफ है कि भारतीय मीडिया ने इन दोनों खुलासों पर बीच-बीच में लेख प्रकाशित किया। माकपा सांसद अमल दत्ता ने 7 दिसंबर, 1991 को 2.2 अरब डालर के मसले को संसद में उठाया था, लेकिन उस वक्त लोकसभा के अध्यक्ष रहे शिवराज पाटिल ने राजीव गांधी का नाम कार्यवाही से निकलवा दिया था। संदेह का घेरा सवाल यह उठता है कि इन दोनों खुलासों पर सोनिया गांधी और 1988 में बालिग हुए राहुल गांधी ने क्या जवाब दिया? जवाब है कुछ नहीं। सच कहा जाए तो इन खुलासों से ज्यादा गांधी परिवार की चुप्पी ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। जब श्वेजर इलस्ट्रेटे ने यह आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने राजीव गांधी द्वारा घूस में लिए गए पैसे को राहुल गांधी के खाते में रखा है, तो मां-बेटे में से किसी ने न तो इसका विरोध किया और न ही इस पत्रिका के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की। मां-बेटे ने न ही 1998 में इस मामले पर लेख लिखने वाले एजी नूरानी के खिलाफ कोई कदम उठाया और न ही संबंधित दस्तावेज 2002 में अपनी वेबसाइट पर डालने वाले सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ कुछ किया। न ही उन्होंने मेरे या एक्सप्रेस के खिलाफ 2009 के अप्रैल में इन तथ्यों पर आधारित लेख छापने के लिए कोई कानूनी कार्रवाई की। जब 1992 में रूस में केजीबी से संबंधित खुलासे की खबर दि हिंदू और टाइम्स आफ इंडिया ने प्रकाशित की, उस वक्त भी किसी गांधी ने कोई शिकायत नहीं की। न ही किसी गांधी ने येवगेनिया अलबतस के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की जिन्होंने 1994 में केजीबी और राजीव गांधी के बीच पैसे के लेनदेन के बारे में लिखा। न ही इन लोगों ने 15 अगस्त, 2006 को ऐसा लेख लिखने वाले राजिंदर पुरी के खिलाफ कोई कदम उठाया। हालांकि, 2007 में सोनिया के कुछ वफादार लोगों ने उनकी प्रतिष्ठा बचाने के लिए अमेरिका में बड़े अनमने ढंग से एक मुकद्दमा जरूर दर्ज कराया था। ऐसा तब हुआ जब वहां के कुछ प्रवासी भारतीयों ने अलबतस के खुलासों के आधार पर पूरे पन्ने का विज्ञापन न्यूयार्क टाइम्स में छपवाया। वे सोनिया गांधी की सच्चाई को अमेरिका वालों के सामने रखना चाहते थे। अमेरिकी अदालत ने इस मुकद्दमे को तुरंत खारिज कर दिया क्योंकि सोनिया गांधी खुद अपने नाम से मुकद्दमा दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। आश्चर्य की बात यह है कि इस मुकद्दमें में भी स्विस बैंक में 2.2 अरब डालर होने की बात को चुनौती नहीं दी गई थी। अगर मान लिया जाए कि ये दोनों खुलासे आधारहीन हैं और गांधी परिवार ईमानदार है तो ऐसे में उनकी ओर से कैसी प्रतिक्रिया होनी चाहिए थी? ईमानदार आदमी की प्रतिक्रिया वैसी ही होती है जैसी मोरारजी देसाई ने दी थी। जब पुलित्जर पुरस्कार विजेता खोजी पत्रकार सेमोर हेर्स ने अपनी किताब में यह आरोप लगाया कि भारतीय कैबिनेट में मोरारजी सीआईए एजेंट थे तो 87 साल के बूढ़े और रिटायर्ड मोरारजी देसाई ने न सिर्फ गुस्से का इजहार किया बल्कि एक मानहानि का मुकद्दमा भी दर्ज कराया। मोरारजी देसाई के मरने के पांच साल बाद अमेरिकन स्पेक्टेटर में रेल जेन आइजैक ने लिखा कि हेर्स चरित्र हनन करने में माहिर थे और हेनरी किसिंजर को नीचा दिखाने के लिए उन्होंने मोरारजी को निशाना बना लिया। जब मोरारजी के मानहानि मुकद्दमे पर सुनवाई शुरू हुई तो 93 साल की उम्र वाले मोरारजी अमेरिका जाने में सक्षम नहीं थे और उनकी जगह पर किसिंजर ने जाकर हेर्स के दावों को खारिज किया। कहने का मतलब है कि अगर कोई ईमादार होता है तो अपनी उम्र का ख्याल न करते हुए खुद पर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देता है। संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अब तक इस मसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह तब जब वे पूरी तरह से सक्रिय हैं, न कि मोरारजी देसाई की तरह सेवानिवृत्त और बुजुर्ग। जब स्विस पत्रिका में यह मामला उजागर हुआ था तो उनकी उम्र महज 41 साल थी। अगर सोनिया और राहुल के बजाए इन दोनों खुलासों में भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी का नाम होता तो भारतीय मीडिया और सोनिया गांधी की सरकार उन्हें सलाखों के पीछे भेजने के लिए क्या नहीं करती। 20.80 लाख करोड़ रुपए की लूट स्विस बैंक में गांधी परिवार के अरबों रुपए का मामला विदेशी गुमनाम खातों में जमा भारतीय पैसे को वापस लाने से जुड़ा हुआ है। भारत को छोड़कर दुनिया के सभी देशों ने स्विस बैंक और इसकी तरह अन्य बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने में दिलचस्पी दिखाई है। पर भारत ने इस काम में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। आखिर ऐसा क्यों? 2009 में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने यह कहा था कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो विदेशों में जमा काले धन को वापस लाएंगे। विदेशों में भारत का 500 अरब डालर से लेकर 1400 अरब डालर के बीच काला धन जमा होने का अनुमान है। कांग्रेस ने इतनी रकम होने की बात को शुरुआत में नकार दिया था। पर जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने भी यह कहा कि वे इस काले धन को वापस लाएंगे। वैश्विक स्तर पर काले धन के मसले पर काम करने वाली संस्था ग्लोबल फायनैंशियल इंटीग्रिटी (जीएफआई) ने भारत में हुई लूट के बारे में कहा है, ”1948 से लेकर 2008 के बीच भारत ने 213 अरब डालर काले धन के रूप में गंवाए हैं। यह कर चोरी, भ्रष्टाचार, घूसखोरी और आपराधिक गतिविधियों के जरिए किया गया है।” ऐसे में क्या किसी को यह बताने में बहुत मुश्किल होगी कि आखिर कैसे सोनिया के परिवार के गुप्त खाते में 2.2 अरब डॉलर आए? जीएफआई के आंकड़े में 2जी और राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन के नाम पर हुई लूट तो शामिल ही नहीं है। अब ऐसे में इस बात पर विचार करना जरूरी हो जाता है कि सोनिया गांधी के गुप्त खाते की वजह से भारत का विदेशों में जमा काला धन वापस लाने की कोशिशों पर किस तरह का असर पड़ेगा? लूटने वाले सुरक्षित कुछ उदाहरणों से यह बात साफ हो जाएगी कि भारत सरकार किस तरह विदेशों में जमा भारत के काले धन को वापस लाने में दिलचस्पी नहीं ले रही है। 2008 के फरवरी में जर्मनी के सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी जुटाई की लिशेंस्टीन बैंक में दुनिया के कई देशों के नागरिकों ने कितना काला धन जमा किया है। जर्मनी के वित्त मंत्री ने उस वक्त कहा कि अगर दुनिया की कोई और सरकार काला धन जमा करने वाले अपने नागरिकों का नाम जानना चाहती है तो वे उसे ये नाम दे देंगे। मीडिया में कुछ ऐसी खबरें आईं जिनमें कहा गया कि लिशेंस्टीन बैंक से जिन खाताधारियों के नाम मिले हैं उनमें 250 भारतीय भी हैं। जर्मनी के खुले प्रस्ताव के बावजूद संप्रग सरकार ने इन नामों को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। टाइम्स आफ इंडिया में भी उस समय एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें बताया गया कि वित्त मंत्रालय और प्रधनमंत्री कार्यालय लिशेंस्टीन के खाताधारियों के नाम जानने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इस बीच दबाव बढ़ने पर भारत सरकार ने नाम के लिए अनुरोध तो किया लेकिन खुले प्रस्ताव के बजाए जर्मनी के साथ हुए कर समझौते के तहत। आखिर दोनों में फर्क क्या है? फर्क यह है कि कर समझौते के तहत मिलने वाले नामों को गोपनीय रखा जाता है लेकिन खुले प्रस्ताव के तहत मिलने वाले नाम को सार्वजनिक किया जा सकता है। इससे साफ हो जाता है कि सरकार वैसे लोगों का नाम नहीं उजागर करना चाहती है जिन्होंने काला धन विदेशी बैंकों में जमा कर रखा है। दूसरा सनसनीखेज मामला है हसन अली का। पुणे के इस कारोबारी के बारे में यह पाया गया कि वह 1.5 लाख करोड़ रुपए के स्विस खाते का संचालन कर रहा था। आयकर विभाग ने उस पर भारत का पैसा गलत ढंग से विदेशी खाते में रखने के लिए 71,848 करोड़ रुपए का कर लगाया। इस मामले में जानकारी हासिल करने के लिए स्विस सरकार को जो अनुरोध भेजा गया उसे इस तरह से तैयार किया गया कि सूचनाएं नहीं मिल सकें। हसन अली के साथ कई बड़े नामों के जुड़े होने की बात की जा रही है। सरकार आखिर क्यों नहीं इस मामले की गहराई से जांच करना चाहती है। हसन अली जैसे लोग ही भारत के भ्रष्ट लोगों का पैसा विदेशों में हवाला के जरिए पहुंचाते हैं। अगर हसन अली से जुड़ी सच्चाई सामने आ जाती है तो कई भ्रष्ट लोग नंगे हो जाएंगे। हमें यह भी समझना होगा कि सोनिया गांधी के अरबों डालर स्विस बैंक में होते हुए भारत के 462 अरब डालर की लूट की स्वतंत्र जांच नहीं हो सकती। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने चुनाव लड़ते वक्त जो हलफनामा दिया था उसके मुताबिक दोनों की संयुक्त संपत्ति सिर्फ 363 लाख रुपए है। सोनिया के पास कोई कार नहीं है। 19 नवंबर 2010 को सोनिया ने कहा कि भ्रष्टाचार और लोभ भारत में बढ़ रहा है। 19 दिसंबर 2010 को राहुल गांधी ने कहा कि भ्रष्ट लोगों को कठोर सजा दी जानी चाहिए। आमीन!

    डॉ राजीव कुमार रावत के द्वारा
    July 16, 2011

    मित्र वासुदेव त्रिपाठी जी, प.पू. सूर्यकांत त्रिपाठी जी जैसी अंगारों की दाहक पावक प्रज्वलित करने के लिए आप साधुवाद के सच्चे पात्र हैं,  और इस अप्रतिम साहस के लिए निश्चित ही आपकी सराहना करता हूं। कुछ प्रश्न सदैव से ही मेरे मन में आते रहे हैं और आपके दो आलेख पढ़ने के बाद उन्हीं को उलट पलट रहा हूं- कि इस तरह के आलेखों का हश्र ही क्यों होता है कोई आग क्यों नहीं लगती, यदि चार छह हजार लोग देश में  ऐसे हैं तो बाकी के 121 करोड़ धर्मात्मा क्यों चुप पड़े रहते हैं- देश बहुत महान था , तो कायर क्यों था , क्यों  लुटता पिटता रहा, और क्यों लुट पिट रहा है- बाबा रामदेव के ऊपर अत्याचार को सबसे कम दैनिक जागरण  ( जिससे सबसे ज्यादा आशा थी ) ने ही छापा , क्यों नहीं दैनिक जागरण ने इस ऐतिहासिक अवसर पर वीरता  दिखाई - क्यों नहीं लाला जगतनारायणजी , विद्यार्थी जी जैसा साहस किसी संपादक में बचा ——————————— भैया- उपाय बताओ, मुझे तो नाना पाटेकर की क्रांतिवीर के वह आखिरी सीन आते हैं– जब वह जल्लाद के हाथों से फांसी का फंदा ले कर गले में डालता है —- ला ला भाई मैं किसे समझा रहा हूं -उसी कांग्रेस को देश पुनः सत्ता सौंपता है– फिर कोई विकल्प भी कौंन बेहतर है— आखिर क्या करें- सिर्फ हंगामा  खड़ा करना मेरा मकसद—– भैया ये बताओ सूरत बदले कैसे —– सादर

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    भाई राजीव जी, आपकी प्रशंसा का पात्र मैं स्वयं को नहीं समझता किन्तु आप सभी का यह मुग्ध करने वाला सहयोग मेरा प्रोत्साहन अवश्य करता है, जोकि मुझ जैसे युवा के लिए महान संबल है| जब तक हम मौत के सौदागरों को पहचान कर समाज से अलग नहीं करते और उनका अंत नहीं होता भारत रुपी इस मधुर सौम्य तालाब को बिषाक्त किया जाता रहेगा…! तभी हमारे जैसे लाखों लोगों के प्रयास सफल हो सकते हैं| किन्तु फिर भी बन्धु मैं प्रयास की सफलता पर लगने बाले प्रश्नचिन्हों पर सदैव यही कहता हूँ कि शून्य से एक भी सदैव अधिक होता है| धन्यवाद|

    Dr S Shankar Singh के द्वारा
    July 21, 2011

    प्रिय मिश्र जी, सादर नमस्कार. आप कई बार अपने लेखों और टिप्पणियों में ‘ सोनिया गांधी का सच लेखक – एस. गुरुमूर्ति ‘उद्धृत करते हैं. यह्कोई पुस्तक है या ब्लॉग पोस्ट. मैं इसे मौलिक रूप में पढ़ना चाहता हूँ. कृपया reference भेजें. हो सके तो मौलिक रूप में मेरे email पर फॉरवर्ड कर दें.कृपया इस पर भी प्रकाश डालें की क्या वजह है यह सारी बातें प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में नहीं आ पाती हैं. singhsshankar@gmail.com

RAMESH AGARWAL के द्वारा
July 15, 2011

RESPECTED VASUDEVJI, SORRY FOR WRITING IN ENGLISH.I DONT KNOW HOW TO TYPE IN HINDI.CONG. FOR BEING MOT VIEWED WRITER.YOUR COMMENTS MUST BE READ BY ALL AND WE INDIANS ARE ASHAMED THAT EVEN AFTER 64 YRS OF INDEPENDENCE WE ARE STILL BEING VICTIMISED AND BEING TREATED AS 2ND CLASS CITIZEN BY RULING CLASSES AND FAULT IS WITH US WE ARE NOT UNITED WHERE AS MUSLIMS ARE VERY UNITED THAT IS WHY ALL POLITICIANS RUN AFTER THEM.ACTUALLY IT IS MUSLIM STATE WITHOUT NAME.EVEN DREADED TERRORISTS ARE NOT BEEN HANGED DUE TO BEING MUSLIMS AND FOR VOTE BANKS.IT WASOUR BAD LUCK THAT SARDAR PATEL DIED AT EARLY STAGE AND WE COULD NOT PRODUCE A BOLD LEADER.HINDUS AND THEIR CULTURE, RELIGION CIVILISATION AND THEIR GURUS ARE BEING TARGETTED BY ALL AND MEDIA IS ALSO BEING BOUGHT AND ENGAGE IN ANTI HINDUS PROPOGANDA.THEY WILL NOT FOCUS ON EXCELLANT SERVICES PROVIDED BY OUR SPRITUAL GURUS.,RSS,VHP AND OTHERS BUT ALWAYS TARGET THEM AND PAINT THEM AS VILIANS.THE TREASURE FOUND INTACT FROM PADAMNATHJI TEMPLES IS DONATION BY HINDUS FOR BHAGWANJI AND SHOW THE HONESTY OF OUR PEOPLE ONCE IT HAS GONE TO GOVT IT WILL BE LOOTED.IT SHOULD BE USED ONLY FOR HINDU RELIGION AND FOR TEMPLE.WHY NO ONE TALK ABOUT LAND OF WAQF BOARD AND MONEY POURING IN FROM MUSLIM COUNTRIES.EVERY MUSLIM MIISTER TALKS ONLY FOR MUSLIMS BUT NO HIDU LEADER WILL TALK ABOUT HINDUS CASE.ACTUALLY WE ARE RICHEST NATION IN THE WORLD PROVIDED ALL BLACK MONEY FROM ABROAD IS BEING BROUGHT.WHY KERLA GOVT NOT TALKSABOUT WEALTH OF CHURCHES ?WE ARE WORST UNDER NEHRU/GANDHI RULE IT IS PITY BUT LET US RSOLVE NOT TO VOTE TO SUCH CRIMINALS AND SECULARISTS AND FIGHT UNITELY AGAINST SUCH EFFORTS,ONCE AGAIN DHANYAWAD AND NAMASKAR

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    भाई रमेश जी, हिंदी में लिखने के लिए आप कमेन्ट में हिंदी विकल्प चुन सकते हैं या hinglish चुन कर रोमन शैली में लिख सकते हैं| निश्चित रूप से आज मीडिया और सेकुलरिस्टों की हिन्दू संगठनों के प्रति दोहरी मानसिकता छुपी नहीं रही, अतः हमें सच्चाई को पहचानते हुए अपने वोट से परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए| राष्ट्रहित सर्वोपरि है| आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

alkargupta1 के द्वारा
July 15, 2011

वासुदेव जी , ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बनने की हार्दिक बधाई ! आपका द्वारा प्रस्तुत किये गए आंकड़ों के साथ यथार्थपरक सशक्त लेख के लिए धन्यवाद !

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    आदरणीय अलका जी, प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद|

nishamittal के द्वारा
July 15, 2011

चौकाने वाले तथ्य प्रस्तुत करने पर साधुवाद आपको.बधाई सम्मान के लिए वासुदेव जी.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    आदरणीय निशा जी,आपका हार्दिक धन्यवाद| जो कुछ हमें नहीं बताया जाता वही चौंका देता है|

Ashwani के द्वारा
July 15, 2011

भाई वासुदॆव जी, Thanks a lot for your valuable and informational column. We are expecting more from you. Please share your email-id, I want to keep in touch with you.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    अश्वनी जी, धन्यवाद| मैं आप मुझसे मेरी मेल id पर या फसबुक पर संपर्क कर सकते हैं|

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 17, 2011

    आदरणीय मिश्र जी, आपका हार्दिक धन्यवाद| आशा है आपके द्वारा दी गयीं लिंक सभी पाठकों के लिए ज्ञानबर्धक सिद्ध होंगी|

Sumit Pal के द्वारा
July 15, 2011

पहले अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले लोगो से ३०० rs पर्ती व्यक्ति लिए जाते थे और अब जम्मू कश्मीर और सेंट्रल गवर्मेंट ने २७०० कर दिए है…क्या hamaare हिन्दुओ के लिए कोई सुब्सिटी नही है इस देश में…???? और कश्मीर सर्कार की हिम्मत इतनी है के वो लोग वह अस्थाई टीन शेड डालने ke लिए हमें जमीं भी नही de rhe है…

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 16, 2011

    सुमित जी, आप जैसे आक्रोश की आज इस देश के नवयुवकों को आवश्यकता है| हम ३०० की जगह २७०० भी दे सकतें हैं किन्तु दोहरा व्यवहार सहन नहीं कर सकते|

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 14, 2011

वासुदेव त्रिपाठी जी -मोस्ट विउड ब्लागर ऑफ़ दी वीक बनाने पर हार्दिक बधाई – सार्थक लेख , बेबाक उक्तियाँ आप की , निम्न पर किसी की भी नजर नहीं जाती , वोट बैंक का क्या होगा -ढुलमुल नीति ही हमें खाए जा रही है हर जगह चाहे मुम्बई के बम ब्लास्ट हों चाहे और कोई नीति गत फैसले … आज वक्फ के पास ८,००,००० से अधिक रजिस्टर्ड संपत्तियां हैं| ६,००,००० एकड़ से अधिक जमीन वक्फ के कब्जे में है, जोकि अपने विश्व की सबसे बड़ी संपत्ति है, भारतीय रेलवे और रक्षा विभाग की भूमि के बाद देश का यह तीसरा सबसे बड़ा भू स्वामित्त्व है| किन्तु क्या आपको कभी बताया गया कि इस संपत्ति का मनरेगा और खाद्य सुरक्षा के लिए कैसे प्रयोग किया जा सकता है.? शुक्ल भ्रमर ५

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    आदरणीय भ्रमर जी, आप इस मंच के एक वरिष्ठ लेखक हैं, आपकी प्रतिक्रिया एवं बधाई निश्चित रूप से हमारा उत्साहवर्धन करेगी| आज देश को हमारी अतीव आवश्यकता है अतः प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है वह करने का जो वह देश की सेवा men कर सकता है| इसके लिए सर्वप्रथम मैं आवश्यक समझता हूँ की देश का आम नागरिक सत्य और षड्यंत्रों को समझे, उसी दिशा में मेरा यह छोटा सा प्रयास था|

shivanand के द्वारा
July 14, 2011

मोस्ट विएव्ड ब्लॉगर बनने पर बधाइया

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    मित्र आपका हार्दिक आभार |

rudresh के द्वारा
July 14, 2011

त्रिपाठी जी सबसे पहले मोस्ट viewed ब्लॉगर बनने के लिए बधाई, तथा इस तथ्यपूर्ण तर्कपूर्ण सत्यपूर्ण लेख लिखने के लिए आप साधुवाद के पात्र हैं| इसी तरह आप समाज और हमारे जैसे लोगों का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन करते रहें| जय हिंद जय भारत|

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    भ्राता रुद्रेश जी, आपकी बधाई के लिए आपका शत-शत धन्यवाद| आप सभी का सहयोग रहा तो ये यह प्रवाह अवश्य अविरल रहेगा|

Tamanna के द्वारा
July 14, 2011

सबसे पहले तो मोस्ट व्यूड ब्लॉगर बनने के लिए आपकों हार्दिक बधाई…आपक यह लेख तथ्यों और विचारों के आधार पर बेहद सशक्त है.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    तमन्ना जी, आपकी बधाई लेख की सार्थकता को सिद्ध करती है| आपका हार्दिक धन्यवाद.

rkpandey के द्वारा
July 14, 2011

एक प्रबल आवेग से युक्त राष्ट्रवादी आलेख. तथ्यात्मक, विचारोत्तेजक, छद्म धर्मनिरपेक्षता की जड़ों पर प्रहार करता हुआ आपका यह आलेख निंदित कर्मों में लिप्त राजनीतिज्ञों की कुत्सित चालों को सामने लाता है. मोस्ट व्ह्यूड ब्लॉगर के चयन की बधाई के साथ बहुत बहुत शुभकामनाएं.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    भाई rk पाण्डेय जी, सुगढ़ शब्दों से सुसज्जित आपकी बधाई के लिए आपका ह्रदयतल से धन्यवाद| सर्वाधिक पठित लेखक होना मेरे लिए उतना हर्ष का विषय नहीं है जितना कि एक राष्ट्रवाद से युक्त लेख को पाठकों द्वारा दी गयी वरीयता अभिभूत करती है| यह श्री पाठकों का ही है क्योंकि लेख लिखना तो एक कार्य मात्र है उसका उद्देश्य तो पठन व सत्य को जानना ही होता है|

anshuman के द्वारा
July 14, 2011

bhai vasudev g satya kahne k liye saadhuwaad abhi yah soniya maino sarkar jiske adhikansh mantri isae hai ek naya kanoon banane jaa rahe hai jisme hinduo ko pratarit karne ki poori vyawastha ki gayi hai kya iske baare me b apki jkoi ray hai

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    भाई अंशुमान जी, आपका ह्रदय से धन्यवाद, आपने जिस विषय पर चिंता व्यक्त की है आज वह एक राष्ट्रीय संकट बनती नजर आ रही है| निश्चित रूप से ऐसा कोई विधेयक देश के सांप्रदायिक सद्भाव की हत्या के लिए एक धारदार हथियार सिद्ध होगा, कोई भी संप्रदाय अपने विरुद्ध एकतरफा अत्याचारों को सहन नहीं कर सकती.| मुद्दे का उल्लेख मैंने अपने लेख “कांग्रेस की उंगली पॉवर” में किया है, कृपया वहां देखें| विस्तृत चर्चा के साथ कभी समय मिलने पर उपस्थित होऊंगा|

DHEERAJ PAWAR के द्वारा
July 13, 2011

मैं अपने हर दोस्त को आपका ये ब्लॉग पड़ने को कहुगा

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 13, 2011

    धीरज जी, आपका हार्दिक धन्यवाद|

    Rohit Shara के द्वारा
    July 19, 2011

    Shame on you guys, still u r talking like crimnals.We r living in modern society we shud not talk like this.Its a narrow mentality i mean crimnal mentality-Muslim hindu cristan all r gd creatures-we all r same–i m a hindu but i love all religion.what to say—try to understand hindu religion than u wnt talk like this.u love all

    Jatin Tomar के द्वारा
    July 20, 2011

    वाससुदेवजी,आपने वाकई अपन नाम को चरिताथॆ किया है। अतुलनीय

subhashmittal के द्वारा
July 12, 2011

भाई वासुदेव जी ,इतने विस्तार से और permaanikta से आपने यह लेख लिखा है की ये हिन्दू नाम वाले काले अंग्रेज अगर इसे दिल से पढ़ ले तो वो अपने दुष्ट विचारो से छुटकारा पा सकते हैं और बाकि बचा जीवन देश और संस्कृति की सेवा करके धन्य्कर सकते हैं

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 12, 2011

    सुभाष मित्तल जी, आपने पूरे लेख को इतनी गंभीरता के साथ पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद| रही बात इन काले अंग्रेजों की तो यही जब चोर हैं तो चोरी इनसे कैसे छुपी हो सकती है लेकिन यह दिल से पढने की बात जो आपने कही वो संभव नहीं लगती क्योंकि जिनका आत्मसम्मान मर चुका हो उनके पास दिल के नाम पर और रह ही क्या जाता है….

vishwas के द्वारा
July 12, 2011

apke lekh se mai bhut prabhavit hoa.मीडीया का धर्म होता है के सत्य के पक्ष मे रहेना और बोलना परंतु हमारे देश मे तो हिन्दुओ को गाली दो और मुस्लीम की खुशामत करो यही मीडीया का धर्म हौ गया है.अब हम हिन्दुओ को अपनी चेनल और समाचार पत्रक शरु करना चाहिऎ और मंदिरो मै धन देने के बजाये मीडीया और स्वैच्छीक संस्था के जरिऎ आम व्यक्ति की सेवा करनी चाहिऎ

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 12, 2011

    विश्वास भाई, निष्पक्षता से दूर किसी विशेष समुदाय धर्म को निशाना बनाकर षड़यंत्र रचने वाले इस देश के प्रबल आतंरिक शत्रु हैं| आस्थाओं पर प्रहार स्वीकार नहीं हो सकता, अपने चैनल या अखबार बनाने से कहीं प्रथम आवश्यक है जागरूक और एकजुट होना| हाँ धार्मिक संपत्ति धर्म और उसके अनुयायिओं के कल्याण में लगे और इसके लिए आपके द्वारा अपना तंत्र स्थापित करने का सुझाव विदेशी और विदेश-पोषित शत्रुओं से भारत की नीव की रक्षा करने में निश्चित रूप से प्रभावी सिद्ध होगा| बहुमूल्य टिप्पड़ी के लिए आपका हृदयेन आभार|

ashutosh के द्वारा
July 11, 2011

भाई वासुदेव आपने आज जो लेख लिखा है ,वो समाज को सोचने पर मजबूर कर देगा और एक दिन हर हिन्दुस्तानी अपने आप को एकजुट होने से नहीं रोक सकेगा, और हिंदुस्तान का नाम भी मिस्र देशो की लाइन में खड़ा हो जायेगा| और अंत में हमें सम्पूर्ण आजादी मिलेगी, क्योंकि हमने पहले अंग्रेजो को हिंदुस्तान से भगाया और हमें अब हिंदुस्तान के लुटेरों को हिंदुस्तान से खदेड़ने की सख्त जरुरत है| तो हिन्दुस्तानियो अब भी बक्त है अपने आप को नींद से जगाओ और हिंदुस्तान के लिए कुछ करो ……… जय हिंद

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 12, 2011

    भाई आशुतोष जी, लेख तो बस एक दर्पण है सामाज और देश की स्थितियों परिस्थितियों का.., समाज जागे देश जागे, अपने और राष्ट्र के हित को पहचाने यही एक आवश्यकता है और लेख का उद्देश्य भी.!

rajkishor के द्वारा
July 11, 2011

निःसंदेह प्रशंसनीय

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 12, 2011

    प्रशंसा के लिए आभार राजकिशोर भाई.

mridul saxena के द्वारा
July 11, 2011

desh ke maszido aur madrso ki janch kyo nahi ho rahi hai . usse toh poore desh ka saal bhar ka rashan aur budget nikal jayege.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 12, 2011

    मृदुल जी, मंदिरों और हिन्दुओं के प्रति यही सौतेली सोंच और यही सौतेला व्यवहार हमारी आत्मा को कचोटता है और भारत के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देता है…….. इसे देश हित में नहीं कहा जा सकता नहीं कहा जा सकता.!

anshu के द्वारा
July 10, 2011

 आखिर कोई तो सच कहेगा ,हिन्दू की kamzori ka hamesha से dusro na fayda liya h, हिन्दू की समझ me ek baat kyo nahi aati की yaha से उजाड़ गए तो कहा जायगे,मुसलमानों क पास तो पूरी दुनिया पड़ी h

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 11, 2011

    आशू जी, देश की सांस्कृतिक विरासत हिन्दू संस्कृति ही है अतः इसकी रक्षा राष्ट्रीय कर्तव्य है और यह कर्तव्य उतनी ही निष्ठां से मुस्लिमों को भी निभाना चाहिए जितना कि किसी हिन्दू या सिख बौद्ध जैन को निभाना चाहिए| धन्यवाद|

shivanand के द्वारा
July 10, 2011

बहुत बढ़िया लेख है आखे खुल गई जय हिंद

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 10, 2011

    धन्यवाद बंधू, आशा है एक दिन देश की भी ऑंखें खुलेंगी|

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 10, 2011

    अंकित जी, आप यहाँ तक आये और मुझे अपने पटल तक पहुचाया, आपका हार्दिक धन्यवाद.

chaatak के द्वारा
July 10, 2011

सच्ची और दो टूक बात! जबतक छद्म सेकुलरिज्म अपनी विषैली जड़ें फैलाए रहेगा बहुसंख्यकों को इसी तरह प्रताड़ित किया जाता रहेगा| नेहरू के वंशजों ने हमेशा अपनी राजनीति चटकाने के लिए बहुसंख्यकों को धोखा दिया और उसी का अनुसरण भा.ज.पा. ने किया और हाशिये पर चली गई| अभी तक इनकी गन्दी निगाहें सिर्फ करेंसी पर थीं लेकिन अब सोनिया ने अपनी दुकाने जहाँ भारतीय प्राचीन बहुमूल्य धरोहरें बेचीं जाती हैं (गणपति, और अल एंटीका) हिन्दुओं के धर्म-स्थलों पर मौजूद मूर्तियों और खाजाने को सजा कर नीलाम करने की ठान ली है| अच्छी और बेबाक पोस्ट पर बधाई!

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 10, 2011

    चातक जी, मैं आपके विचारों से शतप्रतिशत हूँ| बात समुदाय विशेष की नहीं बात देश की होनी चाहिए, यदि सभी राष्ट्र के लिए सोचें तो संकट ही क्या है? किन्तु जब गिलानी खुला खुला कहे कि हम अपने दीं के नाते पाकिस्तानी हैं और भारत के नेता उससे गलबच्छे करें और भारत को अपनी माँ बताने बोलों को आतंकी घोषित किया जाये तो इससे ज्यादा राष्ट्रीय दुर्भाग्य और क्या हो सकता है? ईश्वर सभी को सद्बुद्धि दे….

rudresh,. के द्वारा
July 9, 2011

कहा जाता है लोकतंत्र में मीडिया चौथा सबसे महत्वपूर्ण अंग है आज सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार झूठ का प्रचार मीडिया के ही द्वारा ही किया जा रहा है और एक वर्ग विशेष के खिलाफ विशेष सक्रियता है. हर न्यूज चैनल किसी न किसी के हाथो बिका हुआ है. त्रिपाठी जी गूढ़ सत्य की जानकारी देने के के लिए धन्यवाद.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 10, 2011

    यही गम है बस सीने में……….

    Hariom Singh के द्वारा
    July 13, 2011

    सोला आने एकदम खरी बात है। भाई मै तो आपसे impress hoon

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 14, 2011

    हरिओम जी, धन्यवाद| किन्तु प्रभावित करने योग्य हमारी संस्कृति ही एक मात्र प्रभाव रखती है|

neelamsingh के द्वारा
July 9, 2011

वासुदेव भाई , सोये हुए लोगों की आँखें खोलने के लिए धन्यवाद ! आपका यह लेख बहुत मेहनत और शोध करके लिखा गया है | देश को आज ऐसे ही लोगों की आवश्यकता है जो सच को सामने ला सकें | ऐसी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई !

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 9, 2011

    आदरणीय नीलम जी, हृदयेन आभार जो आपने लेख के तथ्यों और शोध को समझा| आशा है प्रयास सार्थक सिद्ध होगा.!

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
July 9, 2011

हम वो हस्ती हैं जो मिटा नही करते | मिटाने वाले खुद ही मिट जाते हैं || यही भारत वर्ष की कहानी है, वर्तमान घटनाएँ बहुत विक्षुब्ध करती हैं, लेकिन अभी बहुत योद्धे हैं, जो देश को बचाने के लिए लगातार कुर्बानियां दे रहे हैं. रात दिन एक कर रहे हैं की मेरा भारत फिर विश्व का सिरमौर बने. कड़वी सच्चियां बयां की हैं आपने., शुक्रिया आपका

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 9, 2011

    शिवेंद्र जी सशक्त प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद| नीति का वचन है कि अग्नि, व्याधि, ऋण एवं शत्रु की उपेक्षा नहीं की जाती| बलिदानियों से भारत माँ की कोख सूनी कभी नहीं रही किन्तु यह हमारा भी उतना ही कर्तव्य है जितना कि किसी अन्य देशवासी का.!

himanshu के द्वारा
July 8, 2011

वासुदेव भाई मै ने आप के ब्लॉग के बारे में अपने मित्र को बताया और कहा की तुम इसे जरुर पढना उसने मुझे बताया की ऐसा कोई ब्लॉग नहीं है तो फिर मैंने आपके ब्लॉग को सर्च किया काफी मेहनत के बाद मै आप के ब्लॉग मिला इस पर मुझे बहुत अफसोश हुआ की बस्ताब में मिडिया बाले ही देश के साथ गद्दारी कर रहे है या अपनी बुराई झेल नहीं पाए जो की हमेसा दूसरो की बुराई दुनते रहते है……..

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    आपकी तरह कुछ अन्य लोगों से भी इस तरह की शिकायत हुई है, ब्लॉग या तो पाठक सर्च करके पढ़ पा रहे हैं या फेसबुक लिंक से.! कारण तो मैं भी नहीं समझ पा रहा हूँ कि ताजे मुद्दे पर, जिस पर मीडिया अपनी एकतरफा राय दे रहा है, लिखे गए लेख को क्यों एक दिन के लिए भी पहले पेज पर स्थान देकर पाठकों से रूबरू होने का मौका नहीं दिया.? मेरे द्वारा अपने लेख के लिए वकालत करना नैतिक नहीं लगता किन्तु कई मित्रों के विशेष अनुरोध पर मैंने व्यस्तता के बाबजूद अपनी जानकारी तथ्यों के साथ प्रस्तुत की, अतः इस तरह की शिकायत निराशा अवश्य देती है| मैं जागरण को आज भी देश के जिम्मेदार मीडिया स्तम्भ के रूप में देखता हूँ, मुझे नहीं लगता जागरण की आलोचनात्मक पंक्तियों पर उसे आपत्ति होनी चाहिए| आप अपने किसी भी मित्र को फेसबुक लिंक के माद्ध्यम से लेख तक पंहुचा सकते हैं|

विजय झा के द्वारा
July 8, 2011

वासुदेव त्रिपाठीजी को बहुत बहुत धन्यवाद, एक ज्ञानवर्धक एवं ऐतिहासिक विवेचनाओं से भरपूर आँख खोलने वाला आलेख के लिए ! आज की सेकुलर मिडिया हिन्दुओं की पैसे पर ऐश करने वाला और हिन्दुओं की गला काटने वाला है !

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    झा साहब धन्यवाद, आधार युक्त सच का सम्प्रेषण ही हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है| इसे हम भी प्रसारित करें और आप भी प्रचारित करें.!

राकेश शर्मा के द्वारा
July 8, 2011

बहुत ही बढिया वासुदेव भाई – बहुत मेहनत की है आपने और बहुत ही अच्छा लेख है आँखे खोलने वाला

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 13, 2011

    राकेश जी, आपका धन्यवाद| देश की जनता जिसे नेताओं मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवियों ने मतिभ्रमित कर के रखा है की आँखें खोलना ही इस लेख का उद्देश्य है, जिसमे यह सफल हो यही मेरे प्रयास की सार्थकता होगी|

anil gupta के द्वारा
July 8, 2011

बहुत बहुत बढ़िया धन्यवाद इतनी सारे सच से रूबरू करने के लिए.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    धन्यवाद अनिल जी, आज सच को पटल पर लाने की ही आवश्यकता है जिसे षड्यंत्रों के गर्तों में दफ़न करने के दुष्प्रयास हो रहे हैं|

santosh kumar के द्वारा
July 8, 2011

प्रिय मित्र , नमस्कार .. शानदार लेख के लिए ह्रदयतल से बधाई ,सदिओं से हिन्दुओं के दमन के बावजूद इस देश में आज भी हिन्दुओं की बात करने वाले कट्टर तथा ओसामा की तरफदारी करने वाले निरपेक्ष माने जाते हैं / सब वेटिकन के इशारे पर हो रहा है /

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    संतोष जी, आपकी प्रेममयी बधाई के लिए मै आपका कृतज्ञ हूँ| इशारे किसके हैं हम सभी जानते हैं या जान जायेंगे| किन्तु आवश्यकता है आज इशारों की सत्ता को उखाड़ फेंकने की…..

SB के द्वारा
July 8, 2011

वासुदेवभाई बधाई के सिवा कुछ नही केहना है । सबकुछ केह दिया आपने ।

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    आदरणीय SB जी धन्यवाद, आप लोगों का सहयोग आशीर्वाद बना रहेगा बहुत कुछ कहता रहूँगा जो कहने नहीं दिया जाता इस देश में…

anoop pandey के द्वारा
July 8, 2011

मत कहो आकाश में कोहरा घना है; ये किसी की व्यक्तिगत आलोचना है. मित्र हिन्दू जो भी आज देख रहा है या जो भी आज तक उसने देखा है वो उसी के कर्मो का फल है. हिम्मत है तो किसी और धर्म के पूजा स्थल के बारे में सवाल उठा कर कोई देखे…..पर क्योकि ये मंदिर था तो कोई भी कोर्ट की शरण में जा सकता है. यदि राजा महमूदाबाद की शत्रु संपत्ति उनकी है…..राज वर्मन परिवार ने क्या पाप किया है? माननीय उच्चय न्यायालय अब विपरीत फैसला कैसे दे सकता है? सच बात का हश्र नक्कारखाने में तूती जैसा होता है. T R P और तुस्टीकरण की भेडचाल में सच कही खो गया है……फिर भी दमदार लेख के लिए आप बधाई के पात्र हैं.

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    मित्र अनूप पाण्डेय जी, देखना है अब, कहाँ तक बिषबेल ये बोते रहेंगे.? चन्द टुकड़ों के लिए घरवार अपना सब जलाकर., देखते हैं मूढमति ये कब तलक सोते रहेंगे…….

himanshu के द्वारा
July 8, 2011

नंगा कर दिया भाई ……………

    vasudev tripathi के द्वारा
    July 8, 2011

    किन्तु निर्लज्जों को नंगा करके भी हमें ही आँख बंद करनी पड़ जाती है………..

    Ankit.....................the real scholar के द्वारा
    July 9, 2011

    बहुत सुन्दर लेख है तथों की सहायता से शर्म्निर्पेक्षों का मुह बंद करवाने वाला लेख


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