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धुंए की धीमी मौत के तथ्य

Posted On: 31 May, 2012 में

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यद्यपि अपने जीवन के अभी तक के 21 वर्षों में मुझे किसी नशे की लत नहीं रही, यहाँ तक चाय की भी नहीं किन्तु मुझे सूचनाओं को जुटाने व आंकड़ों को तरासने का एक नशा बचपन से रहा है। उसी नशे के कारण नशे से दूर होने के बाद भी नशे पर विभिन्न स्रोतों से मैंने कुछ तथ्य आंकड़े जुटाये अथवा अपनी गणनाओं से निकाले। तम्बाकू मुक्ति दिवस पर सरकार द्वारा ख़र्चीले विज्ञापनों की विडम्बना देखकर मुझे इसकी याद हो आई और मैंने कुछ जानकारी फेसबुक पर लिखनी चाही, फिर सोचा जागरण जंक्शन के मित्रोंतक भी इसे पहुंचा दिया जाए। अतः संक्षिप्त जानकारी यहाँ भी प्रस्तुत है यदि किसी के लिए लाभप्रद सिद्ध हो सके।
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no smoking1- धूम्रपान (smoking) करते समय आप निकोटिन, पायरिडीन, अमोनिया, कार्बन मोनो ऑक्साइड, फ्यूरल, फर्माल्डिहाइड, एसीटोन, आर्सेनिक एसिड जैसे 4800 घातक रसायनों (lethal chemicals) को अपने फेफड़ों और खून मे भरते हैं जिनमें से 69 (International Agency For Research On Cancer के अनुसार 43) कैंसर के लिए सीधे उत्तरदायी हैं।
2- एक सिगरेट से आप 100 mg निकोटिन शरीर में भरते हैं, 500 mg एकसाथ इंजेक्शन से ले लें तो तुरन्त मृत्यु निश्चित है।
3- एक सिगरेट में पाया जाने वाला 30-40 mg “टार” कैंसर का सीधा पिता होता है।
4- धूम्रपान करने वाले 61% पुरुषों व 62% महिलाएं 30-69 वर्ष की आयु के बींच किसी भी समय मृत्यु के मुंह मे समा सकते हैं।
5- धूम्रपान से भारत में प्रति मिनट लगभग 2 लोग मौत के मुंह मे समा जाते हैं।
6- भारत में कुल बीमारियों की 40% तम्बाकू धूम्रपान से होती हैं।
7- अमेरिका में धूम्रपान से प्रतिवर्ष 4,4000 लोग मरते हैं।
8- पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 50 लाख से 60 लाख लोग तम्बाकू से होने वाली बीमारियों से मरते हैं।
9- WHO के अनुसार अप्रत्यक्ष धूम्रपान से प्रतिवर्ष मरने वालों की संख्या 6,00,000 है।
10- धूम्रपान ब्लडप्रैशर, हार्ट अटैक, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, एस्फ़ीसीमा, अलसर, टोबैको एम्ब्लीयोपिया (अंधापन), लीवर सिरोसिस आदि पचासों दर्दनाक बीमारियों के लिए सीधे प्रवेशद्वार है।
11- तम्बाकू जनित बीमारियों के इलाज में भारत में प्रतिवर्ष 30,800 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं जबकि भारत का 2012 का स्वास्थ्य बजट 34,488 करोड़ रुपए रहा, 2011 में यह केवल 30,456 करोड़ ही था।
12- अमेरिका में धूम्रपान से पैदा होने वाली बीमारियों पर कुल $150billion अर्थात 8,40,000 करोड़ रुपए खर्च होते हैं, यदि अमेरीकन बनने की कोशिश में लगे आज के युवा यह बराबरी कर लेते हैं तो देश वर्तमान बजट का कुल 59% धुएँ पर खर्च करना होगा जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा पर बजट का 11-12% ही (2011-12 में अधिकतम लगभग 12.97%) दिया जा पाता है|
13- अमेरिका के कम से कम 20% किशोर धूम्रपान के शिकार हैं और ऐसे ही 3000 बच्चे रोज सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं।
14- भारत में इन नशों के लती 50% किशोर इनके परिणाम स्वरूप होने वाली कैंसर जैसी बीमारियों से मरेंगे।
15- एक सर्वेक्षण के अनुसार अभी भारत में 15 से 18 वर्ष की आयु के 15% बच्चे तम्बाकू/धूम्रपान के फंदे में फंस चुके हैं।
16- सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के अनुसार भारत में वर्ष 2011-12 में 116.166 अरब (billion) सिगरेट बेंची गईं। अर्थात भारत के प्रति व्यक्ति को 96 सिगरेट खफ़त की जा रही हैं। इस वर्ष के आंकड़ों के अनुसार 4.19% अधिक उत्पादन हुआ।
17- मैंने गणना की तो पाया कि 38 करोड़ 72 लाख 20 हजार वृक्षों को केवल 2011-12 में ही सिगरेट पिलाने के लिए काटा गया।
18- विभिन्न मूल्यों पर उपलब्ध मंहगी सस्ती सिगरेट का औसत मूल्य यदि 3 रुपए माना जाए तो लगभग 348 अरब रुपये गत वर्ष धुएँ में उड़ा दिये गए जोकि इसी वर्ष भारत के कुल बजट से लगभग दोगुना है।
यह आंकड़ें एक बानगी मात्र हैं क्योंकि यदि एक पेड़ की कीमत, एक पेड़ से होने वाली वातावरणिक क्षति का आंकलन करें, फिर तदनुसार 387220000 पेड़ काटने के परिणाम का आंकलन करें, इससे होने वाले वातावरणिक परिवर्तन तथा प्रति व्यक्ति क्षति निकालें तो ये आंकड़ें बहुत आगे पहुँच जाएंगे। तम्बाकू-धूम्रपान आपके व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं वरन पूरे देश, पूरी पृथ्वी व प्रत्येक मनुष्य को मौत के मुंह में धकेल रहे है। आपको सिगरेट पिलाने के लिए सरकार भले ही कंपनियों को निमंत्रण देती है किन्तु तम्बाकू दिवस पर तम्बाकू/सिगरेट की बुराई में करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च करने पड़ते हैं। यह बड़ी विडम्बना के साथ साथ धूम्रपान के कारण देश का एक अतिरिक्त खर्च है। यह विडम्बना मौत के इस भारी भरकम व्यापार में छिपी है जिसकी ताकत केवल सरकारों को ही नहीं वरन विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था WHO को भी इस मामले पर ठोस कदम उठाने से रोक देती है। मार्च में WHO द्वारा कंपनियों के दबाब में एल्कोहौल उपभोग में 2025 तक 10% कमी के अपने लक्ष्य को अपनी प्रस्तावना सूची से हटा लिया।
इसी जानकारी के साथ मैं सभी धूम्रपान करने वाले बंधुओं को तम्बाकू दिवस (मुक्ति) दिवस की हार्दिक शुभकामनायें कि आप इस भयावह मृत्युपाश से मुक्त हो सकें। यदि आप में से कोई भी इस दुर्व्यसन से ग्रस्त है और इस लेख को पढ़कर इस व्यसन त्याग का साहस करने में सफल होता है तो कृपया प्रतिक्रिया में सूचित करें, तभी इस लेख की सार्थकता होगी।
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-वासुदेव त्रिपाठी

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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
June 18, 2012

बहुत सूचना परक लेख है धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
June 18, 2012

इसे face बुक पर लिखे कर रही हूँ shukriya

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 19, 2012

    बिलकुल यमुना जी!

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
June 14, 2012

वासुदेव जी, नमस्कार- आप कलम के धनी है, नशे से मानव के शरीर में होने वाली क्षति के सम्बन्ध जो जानकारी आपने उपलब्ध कराई है. आप बधाई में पात्र है. कृपा इसे भी पड़ें. http://hnif.jagranjunction.com/2012/06/06/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%9d%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af/

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 19, 2012

    हनीफ जी नमस्कार| धन्यवाद आपकी लिंक के लिए|

sinsera के द्वारा
June 12, 2012

वासुदेव जी नमस्कार , आपका यह तथ्यपरक लेख पढ़ कर व चित्र देख कर यदि थोड़े से लोग भी नशा करना छोड़ दें तो आप को सौ सौ पुन्य मिलेंगे….मेरी ओर से 10 /10 ……….

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 19, 2012

    सरिता जी, लेख का उद्देश्य व सार्थकता यही है कि व्यसन से यदि किसी को मुक्ति मिल सके! …आभार!

June 7, 2012

जिंदगी जीना और बिना नशे के …….एक बेईमानी सी लगती है ………….स्वास्थ्य के प्रति घातक नशे के प्रति जागरूक करता हुआ आलेख………हार्दिक आभार!

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 19, 2012

    धन्यवाद!

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
June 2, 2012

भारत में इन नशों के लती 50% किशोर इनके परिणाम स्वरूप होने वाली कैंसर जैसी बीमारियों से मरेंगे।.. बहुत सुन्दर और उपयोगी जानकारी त्रिपाठी जी ..चिंता तो तब होती है जब इतना ढोल बजने पर समझाने पर भी लोग काल के गाल में जाने को उत्सुक रहते हैं कहते हैं कौन यहाँ रहने वाला मरना तो है ही एक दिन ..हमारी सर्कार भी तो निकम्मी है कौन सा नियम कानून यहाँ चलता है … सार्थक लेख .. भ्रमर ५

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    सुरेन्द्र जी, सही कहा आपने, दुर्व्यसन ऐसी आदत है जो मनुष्य को अँधा बना देती है!! किन्तु फिर भी जागरूकता से नै पीढ़ी को बचाया जा सकता है!! हार्दिक आभार!!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 2, 2012

मान्य वासुदेव त्रिपाठी जी, स्नेहिल नमन ! यह जानकार अपार खुशी हुई कि आप २१ वर्ष के हो चुके पर आप को कोई नशे की लत न लगी , हाँ…. एक नशा है आप को सूचनाओं को जुटाने व आंकड़ों को तरासने का ! अत्युत्तम ! शिवात्मक बोध से पूर्ण आलेख ! बधाई !! पुनश्च !!

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    आदरणीय आचार्य जी, जीवन की दिशा में ज्येष्ठों का कुशल निर्देशन अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है… सौभाग्य से यह मुझे उपलब्ध रहा| हार्दिक आभार!

alkargupta1 के द्वारा
June 2, 2012

वासुदेव जी , विस्तृत आंकड़ों के साथ समाजोपयोगी आलेख की प्रस्तुत किया है इन दुर्व्यसनों से ग्रस्त लोगों के हित में बहुत ही महत्त्वपूर्ण आलेख है जिसे पढ़कर लोग अपनी इच्छाशक्ति पर नियंत्रण करके इनसे मुक्ति पा सकते हैं ……. उत्कृष्ट आलेख की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    आदरणीय अलका जी, हार्दिक धन्यवाद!!

Rajesh Dubey के द्वारा
June 2, 2012

कैंसर के बारे में तथ्य परक लेख के लिए बधाई.

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    राजेश जी धन्यवाद!

dineshaastik के द्वारा
June 2, 2012

बहुत ही ज्ञानवर्धक  एवं जागृत  करने वाले आलेख  के लिये बधाई……

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी!!

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 1, 2012

एक सिगरेट पीने वाले के पास बैठे हुए व्यक्ति को बिना कोई मेहनत किये हुए अपने आप ही उसका दस प्रतिशत धुएं रूपी कमीशन मिल जाता है शिक्षाप्रद लेख पर मुबारकबाद :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P : :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    राजकमल भाई, passive smoking स्मोकिंग से अधिक खतरनाक होता है.. ये तो बेचारे निर्दोषों को मारता है..!! हार्दिक आभार!!

चन्दन राय के द्वारा
June 1, 2012

मित्र , आपके जन हितार्थ किये आकड़ों की पट्टी हर धुम्रपान करने वाले को अपने गले में टांक लेनी चाहिय , और जैसे ही इस बुरी आदत की तलब हो ,इसे पढ़ ले , मुझे यकीं निज प्राणों की रक्षा हेतु सायद उसमे बदलाव आये , हो सके तो सरकार को ये आंकड़े मुहाया करा दो मित्र लगे है बस प्रचार करने

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    चन्दन जी! आपकी सलाह बड़ी ही दमदार है.. जैसे भी इस आत्मघाती बुरे से व्यक्ति को अपने आपको छुड़ाना ही चाहिए!! और मित्र ये आंकड़े सरकार को देने की आवश्यकता नहीं है.. उनके पास ये सारे आंकड़े होते हैं, बस वो इसे दबाना चाहते हैं, मैं आंकड़े प्रायः सरकार से ही लाता हूँ!!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 1, 2012

मुझे शर्म आती है apne पर. क्या करून.

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 4, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी, शर्म के कारण का अंत ही एक मात्र रास्ता होना चाहिए!!

nishamittal के द्वारा
June 1, 2012

गौरव जी ने सही कहा है,वासुदेव जी प्रतिबन्ध नहीं जागरूकता और इच्छा शक्ति दुर्व्यसनों से मुक्त करा सकती है आप्केद्वारा प्रदत्त आंकडें संग्रहनीय हैं.

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 1, 2012

    आदरणीय निशा जी, इस समस्या के समाधान के विषय पर मेरा मानना है कि जागरूकता पहली आवश्यकता है और प्रतिबंध सामानांतर आवश्यकता! जैसा कि मैंने नीचे प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया है| …साभार!

May 31, 2012

वासुदेव जी आपका अध्ययन कमाल का है| इतने सटीक आंकड़े लाते हैं आप| वासुदेव जी मेरा मानना है कि नशाखोरी की लत पूरी तरह इस देश से तभी छूटेगी जब लोग अपनी इच्छाशक्ति से इसे छोड़ना चाहेंगे क्योंकि सिर्फ इस पर बैन लगाने से कुछ नहीं होनेवाला जैसा की बिहार सरकार ने अभी लगाया है| बैन तो बहुत सी चीजों पर है| मानव हत्या पर बैन है, बलात्कार पर बैन है, छेड़खानी पर बैन है लेकिन इनमें से क्या बंद हो रहा है? कुछ भी नहीं| लोगों को स्वयं पर नियंत्रण रखते हुए प्रयास करने होंगे|

    jlsingh के द्वारा
    June 1, 2012

    सहमत!

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 1, 2012

    कुमार गौरव जी, आपके कथन से सहमत हूँ, यह समस्या तभी हल हो सकती है जब लोग ऐसा दृढसंकल्प लें| इसके लिए सकारात्मक वातावरण बनाना होगा, सबसे अधिक आवश्यक है प्रत्येक स्तर पर नशाखोरी का हतोत्साहन व जागरूकता, साथ ही स्कूली शिक्षा में संस्कारों की आवश्यकता है जोकि कॉन्वेंट पद्धति ने लुप्त कर दी है| क़ानून के विषय में आपसे दुसरे कोण से सोचने के लिए कहूँगा.., यदि प्रतिबन्ध व दंड के प्रावधानों के बाद भी हत्या लूट बलात्कार चल रहे हैं तो क्या कानून की दृष्टि में इन्हें प्रतिबन्ध मुक्त कर देना चाहिए?? कानूनी प्रतिबन्ध बुराई की संवैधानिक अस्वीकार्यता का सूचक है, और प्रतिबन्ध का न होना उसे स्वीकारोक्ति देने की भावना समाज में उत्पन्न करता है| जो समाज व राष्ट्र के लिए घातक है उस पर प्रतिबन्ध भी नितांत आवश्यक है और सामाजिक चेतना भी..!!

    vasudev tripathi के द्वारा
    June 1, 2012

    जवाहर जी धन्यवाद!


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