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शांति के बहाने आतंक को निमंत्रण

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hinarabbanikhar0709एक शान्त व सुखी जीवन के लिए शांत परिवार के साथ-साथ शांत पड़ोसी का होना भी परमावश्यक है, यह सत्य जितना व्यक्तिगत स्तर पर प्रासंगिक है उतना ही राष्ट्रीय स्तर पर भी। यह आपकी योग्यता व दूरदर्शिता की चुनौतीपूर्ण परीक्षा ही होती है यदि आपको स्वभाव से ही उद्दंड व दुष्ट पड़ोसी पाले पड़ जाए! दुर्भाग्य से एक राष्ट्र के रूप में भारत के साथ कुछ ऐसा ही है।
पाकिस्तान अपने जन्म के दिन से ही भारत का शत्रु है और भारत की राह में कांटे बोने का काम बखूबी कर रहा है। किन्तु साथ ही यह स्वीकारने में भी संकोच नहीं होना चाहिए कि भारत अपने इस उद्दंड व विश्वासघाती पड़ोसी से निपटने में उस निपुणता व दूरदर्शिता का परिचय नहीं दे पाया है जो आवश्यक थी। किन्तु अतीत की इन भूलों से हमें अब तक बहुत कुछ सीख लेना चाहिए था किन्तु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। भारतीय विदेशमंत्री एस एम कृष्णा ने पाकिस्तान जाकर जिस प्रकार से शांति की दिशा में कदम बढ़ाने के नाम पर कुछ बेहद गलत निर्णय लिए उससे एक बार फिर स्पष्ट हो जाता है कि हम अभी तक गलतियों को दोहरने के पुरानी रोग से नहीं उबर पाए हैं।
विदेश मंत्री ने पाकिस्तान पहुँचते ही वीजा नियमों को आसान बनाए जाने संबंधी ठीक वैसा ही निर्णय लिया जैसा कि उनकी इस यात्रा से पूर्व ही कयास लगाए जा रहे थे, इससे स्पष्ट है सरकार पहले ही इस निर्णय के लिए पूरा मन बना चुकी थी जबकि 26/11 जैसी घटना के साये में उलझ चुके सम्बन्धों के बाद विदेशमंत्री स्तर की इस वार्ता का उद्देश्य स्थितियों को भांपना और पाकिस्तान से अपना दृष्टिकोण करना होना चाहिए था। यह समझ से परे है कि 26/11 के बाद जिन कारणों व उद्देश्यों को ध्यान में रखकर पाकिस्तान से संबंध विच्छेद का निर्णय लिया गया था उनमें से क्या कुछ पूरा हो गया है कि अब शांति बहाली के एकतरफा व्यग्र हो जाना चाहिए? एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत से आशा थी कि वह 26/11 के पाकिस्तान में बैठे कर्ता-धर्ताओं को सौंपे जाने के लिए पाकिस्तान को विवश करेगा किन्तु इसके विपरीत भारत पाकिस्तान को यह मनवाने तक में असफल रहा कि इस जघन्य षड्यंत्र के लिए उसके यहाँ स्वच्छ्न्द घूमते हाफिज़ सईद जैसे आका जिम्मेदार हैं।
कश्मीर और आतंकवाद भारत और पाकिस्तान के बींच परंपरागत और प्राथमिक समस्याएँ हैं जिसमें आतंकवाद एक ऐसा विषय है जिसके हल हुए बिना अन्य किसी बिन्दु पर सोचा जाना भी किसी राष्ट्र के हित में नहीं हो सकता। एक ऐसे समय जब सम्पूर्ण विश्व में पाकिस्तान की छवि एक आतांकवाद पोषक मुल्क के रूप में उभर चुकी है और स्वयं अमेरिका भी आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की लगाम कसे है, भारत द्वारा जिस प्रकार बिना मौसम वीजा नियमों में ढील देते हुए पाकिस्तानियों का स्वागत करने का निर्णय लेकर आतंकवाद के मुद्दे को नेपथ्य में धकेल दिया गया वह निःसन्देह आश्चर्यजनक व आत्मघाती है। यह अभी तक समझ नहीं आ रहा कि 26/11 के बाद पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाब बनाने की जो बातें हो रही थीं उनका क्या हुआ?
यह सत्य है कि भारत और पाकिस्तान के मध्य कई बिलियन डॉलर के व्यापार की संभावनाएं हैं जिसे ध्यान में रखते हुए व्यापारिक सम्बन्ध बहाल होना दोनों देशों के वृहत आर्थिक हित में है और इसके लिए वीजा नियमों में ढील देने की महती आवश्यकता थी किन्तु फिर भी व्यापारिक आवश्यकताएँ उपरोक्त प्राथमिकताओं को गौड़ नहीं कर सकतीं। प्रत्येक स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और उससे समझौता नहीं किया जा सकता। 38 वर्ष पुराने वीजा नियमों को हटाकर जो प्रावधान लाये गए हैं उनमें से कई फूलप्रूफ सुरक्षा का आश्वासन नहीं देते। नए प्रावधान के अनुसार वीजा आवेदन के 45 दिनों के भीतर प्रदान करना अनिवार्य होगा जबकि अब तक इस तरह की कोई समय सीमा नहीं थी। इसके अतिरिक्त नए वीजा नियम के अनुसार वीजा तीन महीने के स्थान पर छह महीने के लिए दिया जाएगा और भारत आने वाला पाकिस्तानी नागरिक किन्हीं पाँच स्थानों की यात्रा कर सकेगा जबकि पूर्व में तीन स्थान ही वैध थे। ऐसे में यह शंका उत्पन्न होती है कि 45 दिनों की समय सीमा में एक आतंकवादी देश से आने वाले नागरिकों की पृष्ठभूमि और मंसूबों की कितनी बारीक और गहरी जांच पड़ताल की जा सकेगी? स्वाभाविक है कि जैसे जैसे आने वाले पाकिस्तानियों की संख्या बढ़ेगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए उनकी हकीकत खोद पाना दुष्कर होता जाएगा और आतंकी संगठन इसका पूरा लाभ उठाने का प्रयास करेंगे। इस नए करार के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे, 65 वर्ष से अधिक वरिष्ठ नागरिक व ऐसे व्यक्ति जिनका विवाह भारत में अथवा भारत से पाकिस्तान में हुआ है दो वर्ष तक के वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हाँलाकि एक साथ तीन माह से अधिक रहने की छूट नहीं होगी किन्तु बार बार आने में पूरी सुविधा अवश्य होगी। भारत की मुस्लिम महिलाएं अभी भी अच्छी संख्या में पाकिस्तान में शादी करती हैं अतः जमाई बनाकर आतंकी संगठन भारत में आतंक की खुराक नहीं भेजेंगे, इसकी गारंटी कौन ले सकता है? आतंकी हमले के लिए सटीक स्थानों की रेकी व पड़ताल आतंकवादियों की पहली आवश्यकता होती है जिसके लिए भारत में पैठ बनाना आवश्यक होता है। 26/11 के लिए यह काम डेविड हेडली ने किया था। हाँलाकि पाकिस्तानी नागरिकों के लिए प्रत्येक गंतव्य की जानकारी पुलिस को देना आवश्यक है किन्तु न ही पुलिस हर आगंतुक के पीछे-पीछे रहती है और न ही आतंकियों के लिए पुलिस के रहते पड़ताल असंभव काम है। विशिष्ट व्यापारियों के साथ-साथ 65 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों, जिनमें हाफ़िज़ सईद जैसे मौलाना भी हो सकते हैं, के लिए पुलिस को जानकारी देना भी आवश्यक नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है आसानी से आने जाने के चलते भारत के सिमी और इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों के और भी सक्रिय हो जाने की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी जिनके तार सीधे सीमा पार से जुड़े हैं।
यह भी एक विडम्बना ही है कि जिस दिन देश के विदेश मंत्री इस्लामाबाद में पाकिस्तानियों के लिए वीजा आसान करने का करार कर रहे थे उसी दिन दिल्ली में प्रधानमंत्री सुरक्षा एजेंसियों की एक मीटिंग में चेतावनी दे रहे थे कि सीमा पार से कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में आतंकी घुसपैठ की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्री की यह चिंता बिलकुल अनुचित नहीं है क्योंकि गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान से 2008 में 342, 2009 में 485, 2010 में 489 व जून 2011 तक 52 घुसपैठियों ने भारत में घुसपैठ का प्रयास किया। इसी समय में कुल 305 घुसपैठिए सेना द्वारा मार गिराए गए। घुसपैठ का सुनियोजित षड्यंत्र आईएसआई व पाकिस्तानी सेना द्वारा संचालित होता है जिसके लिए 2003 में किए गए संघर्ष विराम का उल्लंघन कर पाकिस्तानी सेना भारतीय चौकियों पार गोलीबारी करती रहती है। 2008 से जुलाई 2011 तक पाकिस्तानी सेना ने 168 बार घुसपैठ सफल करने के लिए सीमा पर गोलीबारी की है। पाकिस्तान का यह सिलसिला 2012 में भी अनवरत जारी है और पिछले महीने अगस्त में पाकिस्तान की ओर से लगभग पंद्रह बार सीमा पर गोलीबारी की जा चुकी है। 4 सितंबर को भी 45 मिनट गोलीबारी की खबरें आयीं थी जबकि 5 सितंबर को सेना का एक जवान घुसपैठ असफल करने के प्रयास में शहीद भी हो गया था। ऐसी स्थिति किसी और देश के साथ होती तो परिणाम विस्फोटक हो सकते थे किन्तु भारत के विदेश मंत्री 8 सितंबर को इस्लामाबाद जाकर वीजा आसानी से देने की व्यवस्था कर आए।
निश्चित रूप से वीजा नियमों का यह खेल पाकिस्तानी घुसपैठियों के लिए ही सबसे बड़ी राहत है, जहां तक भारतीयों का प्रश्न है उनके लिए न तो पाकिस्तान जाने लायक कुछ बचा है और न ही आईएसआई के रहते यह इतना आसान होता है। यह तो भविष्य ही बताएगा कि इससे भारत को कितना व्यापारिक लाभ मिल पाता है किन्तु इतना तय है कि यह भारत के हिस्से में कूटनीतिक दबाब की एक बड़ी क्षति है और अब भारत इसी क्षति के चलते 26/11 जैसे हमले के बाद एक बार फिर खाली हाथ खड़ा है! पड़ोसी उद्दंड है किन्तु आज चाणक्य के देश में शांति के बहाने आतंक को निमंत्रण देते इन नितिनियंताओं को कौन समझाए कि राष्ट्र के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा ही प्रथम व सर्वोपरि है!
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वासुदेव त्रिपाठी

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25 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
September 12, 2012

कांग्रेस की नीतियाँ हमेशा से मुस्लिम पोषक रही है उसमे यह भी एक निति है क्यूंकि पाकिस्तान तो एक मुस्लिम राष्ट्र है और ओपने यहाँ भी तो मुस्लिमों की हिमायत ज्यादातर पार्टियाँ करती नजर आ रहीं है यहाँ बहुमत हीं अल्पमत की तरह समझा जा रहा है और बहुमत की बात करनेवालों को सांप्रदायिक करार दिया जा रहा है इस देश की धर्म्निरापेक्छ्ता को ठीक से जनता ने समझना होगा पडोसी देश सीमा पर सुरंग बना रहा है और उसको जल्दी वीजा देकर हमारी सरकार के विदेश मंत्री आने का न्योता दे रहें हैं पूरा विश्व ब्यापार के लिए कम पड़ रहा है जो ऐसे धोकेबाज मुल्क से दोस्ती की चाहत बन रही है यह तो कांग्रेस ही जाने जनता तो मूक दर्शक है वह पहले भी इनकी गलत नीतियों से बर्बाद हो रही है आगे भी उसका हाल बद से बदतर ही होना है पहले ही यहाँ लोग सुरक्छित नहीं अब और असुरक्छा का सामना करना पड़ेगा अपने देशवासियों को पर इसके लिए सरकार और खासकर कांग्रेस तो बेफिक्र बने हुए अपने बाकि के डेढ़ साल पूरा करने में लगी है . ठाकरे जैसे नेता क्रिकेट पर तो पिच खोदने की बात करते हैं पर इस वीजा नियमों में ढील देने पर चुप्पी क्यूँ? कुछ नहीं बोलते क्या बात है .

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 13, 2012

    अजय जी, इस तरह के निर्णयों के पीछे लचर निर्णय शक्ति उत्तरदाई है जोकि देश की दुर्बल छवि बना रही है..!! यह छतिप्रद सिद्ध होगा..!!

chaatak के द्वारा
September 11, 2012

कांग्रेस की देशद्रोही मंशा का सही आंकलन करती इस पोस्ट के हर शब्द पर गौर करने लायक है राष्ट्रवादी विचार को बिलकुल सही दिशा में प्रेरित किया है आपने| क्यों न इस सरकार पर राष्ट्रद्रोह का एक मुकदमा और चलाया जाए?

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    निश्चित रूप से इस प्रकार के निर्णय देश पर भारी पड़ते हैं.! इस पर न्यायलय में मुकदमा चलाने का प्रावधान संविधान नहीं करता क्योंकि निश्चित रूप से यह प्रायोगिक नहीं है किन्तु फिर भी हर पांच साल में बड़ी अदालत में पेशी होती ही है, क्यों वहीँ मुकदमा चले..!!

Chandan rai के द्वारा
September 11, 2012

मित्र , नफरत कभी ख़त्म ना होने वाली प्रकिरिया जिसमे लगातार प्रतिशोध का अंकुरण होता है ! जबकि शांति में असीम शक्ति होती है ,संवाद सदैव हितकर ही होता है चाहे आप दुश्मन से करे या दोस्त से ! नफरत की कूटनीति ही आतंकवाद को जन्म देती है देती रहेगी , जिसमे जितने घर फूकेंगे ,उतने और फुकने को तैयार खड़े हो जायेंगे ! हमें बस अपने सुरक्षा माप दण्डो को मजबूत करने की जरुरत है ,ना की नफरत करने की ! किसी ने ठीक ही तो कहा मेरे दुश्मन मेरे भाई मेरे हम साए जंग तो चंद रोज होते है जिन्दगी बरसो तलक रोती है

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    आपकी बाते काफी सुन्दर हैं चन्दन जी किन्तु वैश्विक राजनीति गलाकाट होड़ का दूसरा नाम है.. जब सामने हाथ में खंजर दबाये पीठ में घोपने की जुगाड़ में दुश्मन खड़ा होता है तब एकतरफा कोरा आदर्शवाद काम नहीं आता है…!! वैश्विक पटल पर अस्तित्व बचाकर रखना एक चुनौती है जो कि राजनीति से पूरी होती है..

snsharmaji के द्वारा
September 10, 2012

हमेशा की तरह एक उमदा लेख है प्रशंसा के लिए शब्दकम पडते है लगता है सोनिया का पालतू हिन्दुओ से  बदलाले रहा है क्योकिि  उग्रवादी मुसलिमो को तो मरेंग नही साथ ही एक कष्ट दे रहा हूं मलिक सायमा  एम ए एल आई केएस ए आईएम ए को सरच पर डाल उसका लेख तेरी धोती मेरी टोपी से सफेद कैसे पढना नमकहरामी कीहद है  करारा जवाब दे सको तो और भी अच्छा

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    हार्दिक आभार शर्मा जी.!

alkargupta1 के द्वारा
September 9, 2012

वासुदेव जी , इनकी बुद्धि के सभी द्वार बंद हो चुके हैं सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो चुकी है इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल तो इनके ज़हन में ही नहीं उतरता है यहाँ विक्रमजीत जी ने बिलकुल सही लिखा है ‘ विनाशकाले विपरीत बुद्धि ‘ बहुत ही अच्छे विषय पर लिखा है….

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    बिलकुल अलका जी! कई बार समझ नहीं आता निर्णय कौन और कैसे लेता है..??

bharodiya के द्वारा
September 9, 2012

घोटाले बाज एक ही जगह घोटाले करते हो ऐसा थोडा है । कोइले की कालिख तो हर क्षेत्रमें पहुंचानी होती है । कोइ भी मंत्रालय क्यों बाकी रहे । विदेश खाते के सी.ए.जी हम बने तो हमारा रिपोर्ट कौन ध्यानमें लेगा ।

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    आदरणीय भरोदिया जी, कारण जो भी हों किन्तु थूक कर चाटने की कहावत जहाँ चरितार्थ हो वहां हित तो नहीं होता.! ये बात समझ में आये तो अच्छा है|

ashishgonda के द्वारा
September 9, 2012

आदरणीय! सादर,,,, आप ने बहुत ही अच्छे और आवश्यक मुद्दे पर लेखन किया है,,आपको धन्यवाद,,,,हम भारतीय हैं और भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी हैं अर्थात हम सब उन्ही की संतान हैं तो अब हम बुरा कैसे देखें, बुरा कैसे सुने, बुरा कैसे लिखें,,,फिर चाहे कोई हमारा ही बुरा क्यूँ न कर रहा हो? विभिन्न मुद्दों पर तो बात हो गई लेकिन कसाब को अभी और बिरयानी खिलाया जाएगा… मेरे एक लेख “अभी और बात-चीत करेगा भारत-पाक” पर आप सादर आमंत्रित हैं .– http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/04/09/%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AA/

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    बिलकुल आशीष जी! आपके ब्लॉग तक हम आने का प्रयास करते हैं|

vikramjitsingh के द्वारा
September 9, 2012

विनाशकाले – विपरीत बुद्धि…. इन्हें आदत पड़ चुकी है….गाल पर तमाचा खाने की…..और उसके बाद फिर दूसरा गाल भी आगे करने की…… सत्य है……इस पार्टी की गाँधीवादी नीति यही कहती है…… ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ के हादसे का बदला पाकिस्तान के अन्दर घुस कर लिया था अमेरिका ने…..और ये तो अफज़ल और कसाब को अपने दामाद बना कर बिरयानी खिलाने में लगे हुए हैं….अभी और कसाब भी आएंगे…….उन का भी हार्दिक स्वागत करेगी….इन हिजड़ों की सरकार…../////

    jlsingh के द्वारा
    September 9, 2012

    सहमती के अलावा क्या लिखूं ???? कब चेतेगी हमारी सरकार ???

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    जिस तरह सरकार ने पाकिस्तान से कार्यवाही करने तक सभी सम्बन्ध समाप्त करने की घोषणा कर सख्ती दिखने का प्रयास किया और बाद में बिना किसी परिणाम के सम्बन्ध बहाली के लिए व्याकुलता दिखाई इससे वैश्विक मंच पर हमारी नीतियों का वजन कम होता है..!! इसके दूरगामी अहितकारी परिणाम निकलते हैं.! सही कहा आपने विक्रम जी विनाशकाले विपरीत बुद्धि.!

dineshaastik के द्वारा
September 9, 2012

आदरणीय वासुदेव जी, सादर नमस्कार। धोखेवाज पड़ोसी से मित्रता का कोई औचित्य नहीं है। वोट बैंक की राजनीति के तहत यह प्रोपगंडा किया जा रहा है। वर्तमान सरकार की नीति भारत विरोधी है। 

    dineshaastik के द्वारा
    September 10, 2012
    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    आदरणीय दिनेश जी, नमस्कार| उसे अधिक निकट नहीं आने देना चाहिए पीठ में छुरा भोंकना जिसका स्वभाव हो.!

nishamittal के द्वारा
September 9, 2012

वासुदेव जी आपके पोस्ट के संदर्भ में मैं कहना चाहूंगी की हमारी नीति है आ बैल मुझे मार अर्थात मुसीबतों को न्यौता देना

    jlsingh के द्वारा
    September 9, 2012

    सहमत! और ज्यादा क्या कहूं !

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    बिलकुल सहमत हूँ निशा जी व जवाहर जी.!

drbhupendra के द्वारा
September 9, 2012

अरे वासुदेव जी ,भारत की क्रिकेट टीम ने इतने दिन तक पाक से मैच नहीं खेला.. वही सज़ा हमारे नेताओ को बहुत ज्यादा लग रहा था,, विशेष रूप से शरद पवार और राजिव शुक्ल को… इन लोगो के मन में वास्तव में राष्ट्र तत्व शून्य हो चूका है

    vasudev tripathi के द्वारा
    September 12, 2012

    क्रिकेट से तो शुरुआत की थी ताकि बात आगे बढ़ सके.! वैसे ऐसे क़दमों से बेहतर ये होता कि क्रिकेट और वार्तालाप बंद ही न करें.. क्योंकि पाकिस्तान और उसकी ISI आतंकवादी हमले बंद कर देगी ऐसी सम्भावना तो अभी नहीं दिखती.!!


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